सूरत में 50 प्रतिशत डाईंग- प्रोसेसिंग मिलें बंद

कोरोना के कारण शहर में मिनी लॉकडाउन जैसा माहौल है। शहर का कपड़ा बाजार भी बंद है, जिसका सीधा असर शहर के डाईंग- प्रोसेसिंग इकाइयों पर पड़ा है। कपड़ा बाजार बंद होने से व्यापारियों द्वारा पेमेंट का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। फिनिश्ड की डिलीवरी भी नहीं हो पा रही है। शहर के 50 प्रतिशत से ज्यादा इकाइयां बंद हो गई है। और कुछ बंद होने की कगार पर है।

कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाने सरकार की ओर से कदम उठाए जा रहे है। भीड़भाड़ वाले व्यापार-उद्योग बंद करने के बाद टेक्सटाइल मार्केट को भी बंद कर दिया गया। कपड़ा मार्केट बंद होने से अब मिलें भी बंद हो रही है। डाईंग प्रोसेसिंग इकाईयों में रो मटेरियल आना बंद होने के साथ पेमेंट पर फंस गया है। मार्केब् बंद होने के कारण व्यापारी नया प्रोग्राम देना भी बंद कर दिया और तैयार माल की डिलीवरी भी अटक गई है। मिलों में तैयार माल का बड़ा स्टॉक पड़ा है। फिनिश्ड माल रखने के लिए जगह नहीं है। मार्केट बंद होने कारण डिलीवरी नहीं हो पा रही है। जिससे नया माल छापना बंद हो गया है। जिनके पास रो-मटिरियल पड़ा है वे एक शिफ्ट में काम चला रहे है। श्रमिक बड़ी संख्या में वतन पलायन कर रहे है।

श्रमिक बाहुल्य क्षेत्र पांडेसरा, उधना, लिंबायत, सचिन से रोजाना चार से पांच बसेस में सवार होकर श्रमिक वतन लौट रहे है। मिल मालिकों के सामने पेमेन्ट की सबसे बड़ी समस्या उभर कर आयी है। कपड़ा बाजार बंद होने से पेमेंट फंसा है और दूसरी ओर बिजली, पानी और गैस के बिलों का भुगतान करना है। अगर 12 मई से कपड़ा बाजार शुरू भी हो जाता है तो कारोबार पटरी पर आने में समय लगेगा।

गौरतलब है कि कोरोना के कारण विपरित परिस्थितियों के मद्देनजर साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने गुजरात गैस कंपनी और साउथ गुजरात बिजली कंपनी लिमिटेड को पत्र लिखकर बिलों के भुगतान में न्यूनतम शुल्क और जुर्माना न लगाने की मांग की है।

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