भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने गोगुन्दा एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

उदयपुर (कांतिलाल मांडोत) भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के द्वारा  गोंडवाना लैंड से प्रथक हुए भारतीय खंड के पर्यावरण जैव मंडल में मूल वंश भील वंश एवं उप समूह की भीली बोली ,भीली संस्कार, भीली पूजा पद्धति, भीली विवाह पद्धति, गणतंत्र समाज व्यवस्था के अस्तित्व  रक्षार्थ यानी ” *भीली अस्मिता*” के संरक्षण हेतु   ” भीलप्रदेश राज्य” बनाए जाने के लिए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया है कि राजपूत रजवाडो की स्थापना के पूर्व यहा भील गणराज्य हुआ करता था।जो सिंधु घाटी सभ्यता पर आर्य  आक्रमण  के समय प्रथम विस्थापन उपरांत अरावली पर्वतमाला के आसपास आबाद थे।गोगुन्दा एसडीएम नीलम लखारा को राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन में कहा गया  है कि राजपूत रजवाडो की स्थापना उपरांत दूसरा बड़ा विस्थापन झेलना पड़ा। अनुसूचित क्षेत्र बनाकर आदिवासियों का विस्थापन का प्रयास चल रहा है।संवैधानिक लोकतांत्रिक विरोध करने पर प्रशासन एफआईआर  कर रहा है।
ज्ञापन के दौरान  कमोल सरपंच शंकर लाल गमेती , झालों का कलवाना सरपंच वालाराम,  सेमड सरपंच केशी बाई ,  सिंघाड़ा सरपंच  वर्दी बाई सरपंच जमना लाल जी, वना राम जी फुला राम जी ,पालीदाणा उप सरपंच केसा राम गमेती ,लखमा राम झेमली, खेमराज ,काना राम,रंग लाल,पुना राम ,बालु राम ,गेहरी लाल सिवडीया ,सोहन,विक्रम,तेजाराम ,थावराराम,नारू लाल आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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