कैट ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजा पत्र, राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री और अधिकारियों की हो जांच

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज प्रधानमंत्री  मोदी को एक पत्र भेजकर उन्हें भारत के 138 करोड़ लोगों के परिवारों के “कर्ता और” मुखिया “के रूप में उद्धृत करते हुए  उनका ध्यान देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना की अत्यधिक गंभीर परिस्थितियों की ओर आकृष्ट किया है जिसमें कोविड के मामलों में राज्य सरकारों की पूर्ण विफलता के कारण इन राज्यों में बड़ी  संख्यां में लोगो को “अनाथ” के रूप में जीने के लिए मजबूर कर दिया है।
कैट ने  मोदी से कहा कि कोविड पीड़ित लोग अपनी जरूरत के समय बेहद जरूरी चिकित्सा सेवाओं को प्राप्त करने में खुद को असहाय पा रहे हैं, यहाँ तक कि उनके पास पर्याप्त धन होकर और किसी भी कीमत का भुगतान करने पर भी  आवश्यक चिकित्सा सहायता या सुविधाएं उन राज्यों में उपलब्ध नहीं हैं जहां कोविड मामले बढ़ रहे हैं और जो लोग साधारण जनता हैं उनकी  मानसिक पीड़ा, संकट, को इस कठिन दौर में आसानी से समझा जा सकता है की क्या उन्हें वास्तव में मेडिकल सुविधा मिल रही होगी। इन राज्य सरकारों के  उदासीन एवं गैर जिम्मेदारान रवैय्ये ने लोगों को भगवन के भरोसे छोड़ दिया है ।
कैट ने इस सम्बन्ध प्रधानमंत्री श्री मोदी से महाराष्ट्र, दिल्ली, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के बेहद लापरवाही के खिलाफ समयबद्ध जांच का आग्रह किया है। क्यों इन जिम्मेदार लोगों ने समय पर निर्णय नहीं लिए और वो कौन सी परिस्थिति स्थिति जिसके कारन ये लोग आराम से बैठे रहे जिसके चलते बड़ी संख्यां में लोगों पर  दुख का पहाड़ टूटा है और उन्हें  मानसिक पीड़ा भी हुई है और उन लोगों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा से  वंचित किया है। इस कृत्य के लिए जो भी   जिम्मेदार लोग हैं उनके खिलाफ कार्रवाई अवश्य की जानी चाहिए । ऐसे मंत्री और अधिकारी बड़े पाप के भागी हैं।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष  बी.सी.भारतिया और राष्ट्रीय महामंत्री  प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि वर्तमान में इन राज्यों में कोविड मामलों के कारण बेहद  अराजक, भयानक और गंभीर स्थिति है। ये सभी राज्य   सरकारें जब कोविड मरीजों की संख्यां प्रतिदिन बढ़ रही थी तब उसकी गंभीरता को मापने में असफल रही हैं और उन्होंने अपने राज्यों में मामलों की बढ़ती संख्या के अनुपात में चिकित्सा सुविधाओं, दवाओं और अन्य चिकित्सा उपकरणों की आवश्यकता का आकलन करने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया और उसका इंतज़ाम तक नहीं किया । लोग दवाओं, इंजेक्शन, बेड और अन्य चिकित्सा सहायता के लिए भीख मांग रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला या मदद करने वाला नहीं है ।
 भरतिया और श्री खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री  मोदी को बताया कि वर्तमान में जमीनी हकीकत बहुत विकट है।अस्पतालों में कोई बेड नहीं है, दवाओं, इंजेक्शन, ऑक्सीजन, की भारी कमी है । डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ पर काम का बोझ आवश्यकता से बेहद अधिक है ! इलाज़ के इंतज़ार में कोविड प्रभावित लोग वैन, कारों या अस्पतालों के बाहर फुटपाथ पर बैठे हुए हैं और वे सभी असहाय हैं।
 भरतिया एवं  खंडेलवाल ने कहा की न केवल इन राज्यों में बल्कि अन्य राज्यों में भी चिकित्सा सुविधा   को सुव्यवस्थित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा  तत्काल आवश्यक कार्रवाई करना जरूरी हो गया है  ताकि वर्तमान कठिन और परीक्षण समय के दौरान कोई भी व्यक्ति  चिकित्सा देखभाल से वंचित न रहे। उन्होंने प्रधान मंत्री को यह भी आश्वासन दिया कि देश भर में 40 हजार से अधिक व्यापारिक एसोसिएशन सरकार के साथ एकजुटता के साथ खड़े हैं और किसी भी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

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