मार्च में राष्ट्रीयकृत बैंकों की देशव्यापी हड़ताल, लगातार पांच दिन बैंक रहेंगे बंद

15 और 16 मार्च को बैंक देशव्यापी हड़ताल पर उतरेंगे

देश भर के राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने भारत सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण के विरोध में 15 और 16 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। देशभर के नौ बैंक यूनियनों ने हड़ताल के आह्वान का समर्थन किया है। गुजरात में सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के सभी कर्मचारी और अधिकारी दो दिवसीय हड़ताल में शामिल होंगे। इसके पहले 12 तारीख को महाशिवरात्रि 13 को चौथा शनिवार 14 को रविवार तथा 15 और 16 को हड़ताल होने के कारण पांच दिन लगातार बैंक बंद रहेंगे।

अकेले गुजरात से 55000 कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल होंगे। सरकार बैंकों का निजीकरण करके निजी कंपनियों को बागडोर सौंपना चाहती है। एक और संभावना यह है कि बैंक विदेशी निवेशकों को सौंप दिया जाएगा।

निजीकरण के विरोध के पीछे एक और कारण यह है कि 1969 में सरकार द्वारा बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने से 30 से 40 साल पहले की अवधि में 1960 से अधिक बैंकों की दयनीय हालत हो गई थी। इसमें लोगों ने अपनी मेहनत की पूंजी गंवा दी। अब भी बैंकों से लोन लेकर रूपए डूबाने वालों की कमी नहीं है।

गुजरात बैंक वर्कर यूनियन के संगठन मंत्री वसंत बारोट ने बताया कि दो राष्ट्रीयकृत बैंको के निजीकरण के विरोध में 15 और 16 मार्च को बैंक बंद रहेंगे। इसके पहले 12 तारीख को महाशिवरात्रि 13 को चौथा शनिवार 14 को रविवार तथा 15 और 16 को हड़ताल होने के कारण पांच दिन लगातार बैंक बंद रहेंगे।

इस मामले में बैंक के निजीकरण को उद्योगों को लोगों की जमा राशि के साथ खेलने का अधिकार देने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा। पिछले 10 वर्षों में बैंकों द्वारा एक लाख करोड़ से अधिक एनपीए किए गए हैं। इसके लिए बड़ी संख्या में बड़े व्यापारी जिम्मेदार हैं। इस संदर्भ में बैंकों के निजीकरण का निर्णय जनहित में नहीं है।

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