कट्टरपंथी विचारधारा वाले तालिबान से भारत को भी खतरा

तालिबान जिस तरह अफगानिस्तान को तहस नहस करने पर तुला है। अफगानिस्तानी नागरिक घर छोड़ कर अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगह पर पहुँच रहे है। कई देशों में अफगानिस्तान के नागरिकों ने शरण ली है।बढ़ते तालिबान के हौसले से अफगानिस्तान की नाजुक स्थिति बन गई है। अफगानिस्तान के सैनिकों ने हथियार डाल दिए है। सरकार संघर्ष रोकने के लिए तालिबानियों को सत्ता में हिस्सेदारी देने की पेशकश की गई है। लेकिन तालिबानियों ने मानने से इंकार कर दिया है।बीस साल तक अमेरिकी फ़ौज अफगानिस्तान में रहने के बाद भी वहाँ शान्ति और सौहार्द स्थापित नही कर सकी। तालिबान पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते बनाना चाहता है। तालिबान ने अफगानिस्तान में कई हिस्सों में अपना कब्जा जमा दिया है। लोगो को मारा जा रहा है।

अमरीका ने अपने लिए अफगानिस्तान में सेना भेजी थी। अमेरिका बीस साल में अरबो रुपए पानी की तरह बहाकर हाथ मलते रह गया। भारत ने अफगानिस्तान में अरबो रुपए का निवेश किया है। जहाँ पर तालिबान का कब्जा हो गया है। भारत की सारी रकम पानी मे डूब जानी है। नतीज़तन, तालिबान पड़ोसी देशो से बातचीत कर उनके साथ मधुर संबन्ध स्थापित कर रहा है। पाकिस्तान और तालिबान के रिस्ते मजबूत है। जिससे भारत को इन दोनों देशों से नुकसान ही होगा। तालिबान यह सोच रहा है कि भारत पहल कर हमसे बातचीत करे। लेकिन भारत पहल नही कर सकता है। ये वो ही तालिबानी है जिन्होंने 1999 में कंधार में प्लेन को हाइजैक कर अजहर मसूद आतंकवादी को छुड़ाया था। 9/11 की घटना विश्व पटल पर है। ओसामा बिन लादेन को अफगानिस्तान में भी शरण तालिबान के इशारो से हुई थी।

लिहाजा, जिस तरह से तालिबान अफगानिस्तान में फैल रहा है। उसके छींटे भारत को भी आने वाले है। बंदूक की नॉक पर सत्ता हासिल करने वाले आतंकी किस किस का भला कर सकते है। बच्चों, बूढो और यतीम लोगो को गोलियां से छलनी करने वालो से कोई क्या उम्मीद रख सकता है । 2001 में तालिबान का उदय हुआ। उसके बाद बड़ी गति से आगे बढ़ रहा है। अफगानिस्तानी नागरिकों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। अमेरिका के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को तालिबान के ठिकानों को नष्ट करने की नसियत के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका को करारा जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान को अफगानिस्तान से कूड़ा साफ करने वाला देश समझता है। हम कूड़ादान है?तालिबान ने शांति वार्ता करने और अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने की बातचीत करने के बाद खून खराबा पर आमदा है। अमेरिका और तालिबान एक टेबल पर बैठ कर शांतिपूर्ण स्थिति का निर्माण करने की मांग को ठुकरा कर खून खराबे पर उतर आया है। यह गलत है।

 

(कांतिलाल मांडोत)

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