गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर बसे लोग चबूतरे या तंबू में इलाज करने को मजबूर

देश सहित महाराष्ट्र और गुजरात में कोरोना के दिनोंदिन मामले बढ़ते जा रहे है। कोरोना मरीजों के चलते सभी अस्पताल और कोविड केयर सेंटर हाउसफूल हो गए है। ऐसे में गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर जमीनी हकीकत सामने आई है। वर्तमान में गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर रहने वाले रोगियों का पेड़ के नीचे या तम्बू में इलाज करवाया जा रहा है।

महाराष्ट्र सीमा से सटे गुजरात के तापी जिले के निझर तालुका के सात गाँव सायला, मोगरानी, ​​तकली, वडिली, भीलभावली, नासेपुर और मोगलीपाड़ा के मरीज नंदुरबार से 15 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के शिवपुर गाँव में इलाज के लिए जा रहे हैं। अस्पताल सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक चलता है। शिवपुर में टेंट के साथ अस्थायी अस्पताल स्थापित किया गया है, जहां कुछ रोगियों का इलाज घर पर, अस्थायी टेंट में, पेड़ों की छाया में, ट्रैक्टरों की छांव में या खलिहान में किया जा रहा है। यहां पेड़ों की शाखाओं पर रस्सी से दवा की बोतलें चढ़ाई जा रही हैं। यहां केवल एक डॉक्टर और सहायक है। अब तक लगभग 400 मरीजों का इलाज किया गया है।

हालांकि यह कोरोना नहीं है, लेकिन टाइफाइड सहित विभिन्न रोगियों का इलाज इस तरह से किया जा रहा है। इसने कई सवाल खड़े कर दिए है, क्या हम कोरोना के खिलाफ इस तरह से जीतेंगे, क्या इस प्रकार गर्म क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा है? इतने सारे सवालों के बीच निश्चित रूप से कुछ डॉक्टर और स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके लोगों के जीवन की रक्षा कर रहे हैं।

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