राहत: अब कोरोना के गरीब मरीजों का भी आयुष्मान और मां कार्ड के जरिए निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज होगा

कोरोना के बढ़ते मामले में सरकार के प्रदर्शन से उच्च न्यायालय नाखुश है। इस पर ध्यान देते हुए उच्च न्यायालय ने कोविड नियंत्रण में अनियंत्रित वृद्धि और संचालन के गंभीर मुद्दों के शीर्षक के तहत पीआईएल) दर्ज की है और 12 अप्रैल से इस मामले की सुनवाई कर रही है। सरकार द्वारा 15 अप्रैल को हाईकोर्ट की सुओमोटो याचिका में दायर हलफनामे में कहा गया कि वात्सल्य कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड में कोरोना का इलाज शामिल है।

15 अप्रैल को सरकार ने उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति भार्गव कारिआ के समक्ष हलफनामा दायर किया। उच्च न्यायालय के सुझाव के बाद ही सरकार ने कोरोना को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी निर्णय लेने शुरू किए। साथ ही कोविड -19 के उपचार में आयुष्मान भारत और माँ वात्सल्य कार्ड योजना को भी शामिल किया गया है।
गरीब मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे

सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय से आयुष्मान भारत और माँ वात्सल्य कार्ड के साथ गरीब रोगियों को अब ज्यादा खर्च के बारे में चिंता किए बिना निजी अस्पताल में मुफ्त में अच्छा इलाज मिल सकेगा। सरकार ने एक हलफनामे में कहा कि राज्य भर के नगर निगम आयुक्तों और कलेक्टरों को जरूरत पडऩे पर किसी भी अस्पताल को हस्तक करने की सत्ता दी गई है। इसके अलावा होटल, हॉस्टल और कम्युनिटी हॉल को केयर सेंटर्स में तब्दील किए जा रहे है। जिससे असिम्प्टोमेटिक और हल्के लक्षणों वाले रोगियों को वहां रखा जा सकें।

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