
₹16,000 करोड़ निवेश के साथ विझिंजम पोर्ट के विस्तार का अगला फेज हुआ शुरू
फेज-2 के साथ केरल में अदाणी का रिकॉर्ड ₹30,000 करोड़ निवेश
विजिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट अब विकास के एक निर्णायक और बड़े चरण में प्रवेश करने जा रहा है। 24 जनवरी 2026, भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने इस रणनीतिक पोर्ट के विस्तार के लिए ₹16,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता की घोषणा की है। यह घोषणा दिसंबर 2024 में कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के बाद विझिंजम के मजबूत और भरोसेमंद प्रदर्शन पर आधारित है और देश के सबसे रणनीतिक समुद्री गेटवे में से एक पर इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े विस्तार का संकेत देती है। इस मौके पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा, “ विझिंजम जिसने भारतीय पोर्ट की सेवा करने वाले एक नेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल के रूप में ऑपरेशन शुरू किया है, पूर्ण विकास के बाद एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब बन जाएगा। यानी विझिंजम अब अफ्रीका और मध्य-पूर्व के बंदरगाहों की भी सेवा करेगा। इसके साथ ही हमारा विझिंजम पोर्ट वैश्विक समुद्री व्यापार के मानचित्र पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।”
इसके बाद, एपीएसईजेड के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अदाणी ने कहा, “बेहद कम समय में विजिंजम ने यह साबित कर दिया है कि जब विज़न और साझेदारी एक साथ आती है तो क्या संभव हो सकता है। महज़ 15 महीनों के कमर्शियल ऑपरेशन में ही विझिंजम भारत का सबसे तेज़ी से 10 लाख टीईयू संभालने वाला पोर्ट बन गया, जिससे केरल को ग्लोबल शिपिंग मैप पर एक नई पहचान मिली।”
शुरुआती सफलता के बाद विझिंजम का ऑपरेशनल परफॉर्मेंस लगातार मजबूत बना हुआ है। ऑपरेशन शुरु होने के पहले ही साल में शुरुआती रैंप-अप फेस भी शामिल है। पोर्ट ने कई राष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्राकृतिक गहराई और प्रमुख पूर्व-पश्चिम शिपिंग मार्गों के बेहद पास होने का फायदा उठाते हुए विझिंजम, भारत के दक्षिणी तट पर एक अहम ट्रांसशिपमेंट गेटवे के रूप में तेजी से उभरा है। विझिंजम भारत का सबसे तेज़ पोर्ट बना जिसने रिकॉर्ड समय में 10 लाख टीईयू (20 फुट लंबा कंटेनर-मानक माप) का आंकड़ा पार किया। ऑपरेशन शुरु के सिर्फ 10 महीनों में ही इसकी सालाना क्षमता 10 लाख टीईयू तक पहुंच गई। पहले साल में पोर्ट ने 615 जहाज़ों को संभाला और कुल 13.2 लाख टीईयू कार्गो हैंडल किया। दिसंबर 2025 में 1.21 लाख टीईयू के साथ यह दक्षिण और पूर्वी तट का सबसे अधिक मासिक टीईयू दर्ज करने वाला पोर्ट भी बना।
विझिंजमे की एक बड़ी खासियत, दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज़ों को संभालने की क्षमता है। दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच बंदरगाह ने 399 मीटर से अधिक लंबाई वाले 50 से ज्यादा अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स (यूएलसीवी) को हैंडल किया। 300 मीटर से अधिक लंबाई वाले 160 से ज्यादा जहाज़ और 16 मीटर से अधिक ड्राफ्ट वाले 50 जहाज़ यहां पहुंचे। एमएससी वेरोना ने 17.1 मीटर ड्राफ्ट के साथ दक्षिण एशिया में नया रिकॉर्ड बनाया, जबकि दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज़ एमएससी इरिना भी विझिंजम आया।
टेक्नोलॉजी और मानव संसाधन के मोर्चे पर भी विझिंजम काफी आगे है। यह भारत का पहला सेमी-ऑटोमेटेड कंटेनर पोर्ट है और देश का पहला पोर्टे है जहां महिला ऑटोमेटेड क्रेन ऑपरेटर तैनात हैं। ‘मेक इन इंडिया’ टेक्नोलॉजी पर आधारित अत्याधुनिक वेसल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (वीटीएमएस) के ज़रिए जहाज़ों और यार्ड मूवमेंट का डिजिटल सुपरविजन किया जाता है, जिससे ऑपरेशन सुरक्षित और सुचारु बना रहता है। तीन किलोमीटर लंबे ब्रेकवॉटर, 18 से 20 मीटर की प्राकृतिक गहराई और बेहद कम लिटोरल ड्रिफ्ट जैसी मजबूत फिजिकल स्ट्रक्चर के चलते विजिंजम साल भर ऑपरेशन करने में सक्षम है और ड्रेजिंग की आवश्यकता भी न्यूनतम रहती है। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स के बेहद करीब स्थित यह बंदरगाह दुबई, कोलंबो और सिंगापुर जैसे स्थापित ग्लोबल हब्स का एक सशक्त भारतीय विकल्प बनकर उभर रहा है। स्वीकृत मास्टरप्लान के अनुसार, फेज-2 में लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जो अब तक के केरल में सबसे बड़े निजी निवेश की कुल ₹30,000 करोड़ का मुख्य हिस्सा है। इस फेज में कंटेनर बर्थ की लंबाई 800 मीटर से बढ़ाकर 2,000 मीटर की जाएगी और ब्रेकवॉटर को लगभग 3,900 मीटर तक विस्तारित किया जाएगा। फेज़-2 के 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य है। इसके बाद विझिंजम की क्षमता 10 लाख टीईयू से बढ़कर 2029 तक 57 लाख टीईयू हो जाएगी।
फेज-2, अदाणी ग्रुप द्धारा केरल में अब तक के घोषित सबसे बड़े निजी निवेश में कुल ₹30,000 करोड़ का अहम हिस्सा है जिसकी घोषणा इन्वेस्ट केरल ग्लोबल समिट 2025 में की गई थी। फेज़-1 और फेज़-2 को मिलाकर यह केरल के इतिहास का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश है। यह विस्तार पोर्ट-आधारित औद्योगिकीकरण, बड़े पैमाने पर रोज़गार समेत केरल को ग्लोबल मैरीटाइम और लॉजिस्टिक्स सेंटर के रूप में और मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

