धर्म- समाज

नशे के खिलाफ युद्ध स्तर पर लड़ाई जरूरी, देश की शांति भंग करने की हो रही कोशिश : संत सुधांशु महाराज

नशा युवाओं की ऊर्जा और भविष्य दोनों को नष्ट कर रहा है

सूरत। विश्व जागृति मिशन के संस्थापक, प्रख्यात कथावाचक और उपदेशक संत सुधांशु महाराज ने कहा है कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत कई पड़ोसी देश भारत को तोड़ने और कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता जताते हुए कहा कि नशे के खिलाफ समाज को युद्ध स्तर पर लड़ाई लड़नी होगी।

संत सुधांशु महाराज ने कहा कि नशा युवाओं की ऊर्जा और भविष्य दोनों को नष्ट कर रहा है और यह देश को भीतर से कमजोर करने का एक षड्यंत्र भी हो सकता है। उन्होंने समाज, सरकार और परिवारों से इस विषय में गंभीरता से कदम उठाने की अपील की।

पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों में संस्कार केंद्र खोलने के विषय पर उन्होंने कहा कि विश्व जागृति मिशन पूरे देश में संस्कार और मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करना चाहता है। उन्होंने कहा, “जहां समस्या ज्यादा गंभीर है, वहां बाह्य लेप भी जरूरी है और भीतर से इलाज के लिए टैबलेट भी देनी होगी।”

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर संत सुधांशु महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरे भारत की सहनशीलता, धैर्य और मर्यादा को चुनौती देने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह भारत की शांति भंग करने और देश में आग लगाने का कुचक्र है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया तो स्थिति कैंसर जैसी गंभीर हो सकती है।

झूठे चमत्कारों और तथाकथित बाबाओं पर टिप्पणी करते हुए संत सुधांशु महाराज ने कहा कि हर चमत्कार ‘कारण और परिणाम’ के सिद्धांत पर आधारित होता है। उन्होंने कहा कि यदि विज्ञानसम्मत तरीके से समाज के हित में कोई कार्य किया जा सकता है तो अवश्य करना चाहिए, लेकिन झूठे चमत्कारों और अंधविश्वास से लोगों को सावधान रहना चाहिए।

अरावली पर्वतमाला से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि पूरे क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है और सरकार पूरी तरह सजग है। उन्होंने विरोध की बजाय वृक्षारोपण पर जोर देते हुए कहा कि अधिक से अधिक पेड़ लगाकर धरती को हरियाली की चूनर ओढ़ाई जानी चाहिए।

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