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आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने आंध्र प्रदेश में ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट के लिए शिलान्यास किया

यह शिलान्यास समारोह आंध्र प्रदेश के  मुख्यमंत्री  एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री  एच. डी. कुमारस्वामी की उपस्थिति में आयोजित किया गया

हजीरा – सूरत, मार्च 23, 2026: आज का दिन आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बना, क्योंकि आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले के राज्यपेटा में उसके नए 8.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (पर्यावरण मंजूरी के अनुसार निर्धारित क्षमता) इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट के लिए शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया। इस परियोजना में लगभग 70,000 करोड़ रुपये से अधिक का चरणबद्ध निवेश किया जाएगा। इसके अलावा, प्लांट के निरंतर निर्माण और विकास के साथ लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की अपेक्षा है।

यह शिलान्यास समारोह आंध्र प्रदेश के  मुख्यमंत्री  एन. चंद्रबाबू नायडू,  केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री  एच. डी. कुमारस्वामी, आंध्र प्रदेश के  उपमुख्यमंत्री  के. पवन कल्याण, तथा आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार, मानव संसाधन विकास (HRD), और रियल-टाइम गवर्नेंस मंत्री  नारा लोकेश की उपस्थिति में आयोजित किया गया। इसके अलावा,  लक्ष्मी मित्तल, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, आर्सेलरमित्तल;  आदित्य मित्तल, चेयरमैन, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया एवं सीईओ, आर्सेलरमित्तल; तथा  दिलीप ऊम्मेन, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया भी उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम ने राज्यभर में उल्लेखनीय उत्साह और ध्यान आकर्षित किया। हजारों लोग इस क्षण के साक्षी बनने के लिए उपस्थित रहे, जो आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के देश की सबसे आधुनिक स्टील निर्माण सुविधाओं में से एक स्थापित करने के सपने को साकार करने की शुरुआत है।

आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया का प्रारंभ से ही लक्ष्य रहा है कि वह अपनी उद्योग अग्रणी क्षमताओं का उपयोग करते हुए भारत में वर्ष 2030-31 तक घरेलू क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता को 300 MTPA तक बढ़ाने में सहयोग दे, जो राष्ट्रीय इस्पात नीति के अनुरूप है। नई स्टील उत्पादन क्षमता के निर्माण के साथ, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने “country-first” उच्च गुणवत्ता वाले स्टील भी प्रस्तुत किए हैं। आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया देश की पहली इंटीग्रेटेड स्टील उत्पादक कंपनी है, जिसे स्टील मंत्रालय द्वारा स्थापित नई ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी के तहत ग्रीन स्टील सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है।

राज्यपेटा में विकसित हो रहे इस नए प्लांट में स्टील उत्पादन कार्य कैलेंडर वर्ष 2029 की पहली तिमाही तक शुरू होने की योजना है, जबकि अन्य यूनिट्स आगामी तिमाहियों में चरणबद्ध तरीके से तैयार होने की संभावना है। “विकसित भारत 2047” के विजन के अनुरूप, इस प्लांट में विभिन्न प्रकार के स्टील ग्रेड्स का उत्पादन किया जाएगा, जिनमें उच्च गुणवत्ता वाले और वैल्यू-एडेड उत्पाद शामिल होंगे, जो भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने, आयात में कमी लाने और उत्पादन आधार को मजबूत करने में सहायक होंगे।

इस अवसर पर, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन MoUs का उद्देश्य NAMTECH (New Age Makers’ Institute of Technology) के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश में भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक टैलेंट इकोसिस्टम विकसित करना है, जिसमें उन्नत तकनीक, मटेरियल्स इनोवेशन, शिक्षा और वर्कफोर्स डेवलपमेंट को आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जा सके। NAMTECH आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया की नॉन-प्रॉफिट शिक्षा और स्किलिंग पहल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी ने कहा: “मैं आंध्र प्रदेश को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं। इस परियोजना का शिलान्यास एक विश्वस्तरीय इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट की शुरुआत को दर्शाता है, जो भारत की इस्पात निर्माण क्षमता को और मजबूत करेगा। यह आंध्र प्रदेश के विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और राज्य के युवाओं के लिए अवसर उत्पन्न करेगा तथा राज्य को औद्योगिक नवाचार के अग्रभाग में स्थापित करेगा। यह भारत को वैश्विक इस्पात निर्माण क्षेत्र में एक अग्रणी के रूप में और मजबूत करेगा।”

एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश ने कहा: “यह परियोजना आंध्र प्रदेश को एक मजबूत निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करते हुए और हमारे राज्य में वैश्विक व्यवसाय के बढ़ते विश्वास को दर्शाएगी। आंध्र प्रदेश सरकार इस निवेश को साकार करने में आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया को पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी, जो विकास लाएगा, रोजगार उत्पन्न करेगा और राज्य को भारत के औद्योगिक भविष्य के लिए और मजबूत बनाएगा।”

एच. डी. कुमारस्वामी, केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री ने कहा: “भारत — जो विश्व में दूसरे सबसे बड़े क्रूड स्टील उत्पादक देश के रूप में स्थापित है — ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अंतर्गत अपने दीर्घकालिक इस्पात उत्पादन लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में इस प्रकार की बड़ी परियोजनाओं के लिए निरंतर निवेश, उन्नत प्रौद्योगिकी और मजबूत क्रियान्वयन क्षमता की आवश्यकता होगी। यह सहयोग वैश्विक अनुभव और देश की महत्वाकांक्षा को एक साथ लाकर भारत के इस्पात क्षेत्र को और मजबूत करेगा। मैं आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया को शुभकामनाएं देता हूं और आशा करता हूं कि यह सुविधा भारतीय इस्पात उद्योग के विकास और आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।”

लक्ष्मी मित्तल, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, आर्सेलरमित्तल ने कहा: “आज भारत के साथ हमारी साझेदारी का एक नया अध्याय शुरू होता है, जो साझा महत्वाकांक्षा और लंबे समय से चले आ रहे विश्वास पर आधारित है। मैं अब पचास वर्षों से इस्पात उद्योग में हूं और मैं ईमानदारी से कह सकता हूं कि भारत में हम जो बना रहे हैं वह मेरे इन 50 वर्षों के अनुभव में विशेष महत्व रखता है। मुझे अत्यंत खुशी है कि हम विकसित भारत की यात्रा में इतना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और विश्वस्तरीय इस्पात निर्माण के माध्यम से यह प्रदर्शित कर रहे हैं कि सतत विकास और देश की आत्मनिर्भरता को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है। मैं इस परियोजना के लिए सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करता हूं और आशा करता हूं कि यह परियोजना स्थानीय समुदायों और पूरे आंध्र प्रदेश के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगी।”

आदित्य मित्तल, चेयरमैन, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया एवं सीईओ, आर्सेलरमित्तल ने कहा: “मैं आंध्र प्रदेश सरकार और भारत सरकार का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस परियोजना को साकार करने में निरंतर सहयोग दिया है। इस्पात जीवन का आधार है और इस नए प्लांट के माध्यम से भारत की इस्पात क्षमता में वृद्धि करने का अवसर प्राप्त होना हमारे लिए गर्व की बात है। यह प्लांट देश के सबसे प्रतिस्पर्धी और आधुनिक प्लांट्स में से एक बनेगा। इसकी समुद्र तट के निकट स्थिति और देश के सबसे समृद्ध लौह अयस्क क्षेत्रों के साथ स्लरी पाइपलाइन द्वारा सुगम संपर्क इसे इस्पात उत्पादन के लिए एक उत्कृष्ट स्थान बनाता है। दक्षिण भारत तेजी से विकसित होता हुआ बाजार है और यह प्लांट क्षेत्र तथा पूरे भारत के ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। अब जब निर्माण कार्य प्रारंभ होगा, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हमेशा सुरक्षा रहेगी। मैं आगे आने वाले प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण को देखने और उसका उत्सव मनाने के लिए उत्सुक हूं। इस सुविधा के पूर्ण होने पर आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया की स्थिति देश की अग्रणी इस्पात कंपनियों में और अधिक मजबूत होगी।”

टडाशी इमाई, रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर, प्रेसिडेंट एवं सीओओ, निप्पॉन स्टील कॉर्पोरेशन ने कहा: “राज्यपेटा का यह प्लांट हमारी वृद्धि के अगले महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करता है। हमारा यह निवेश भारत-जापान संबंधों की भावना को दर्शाता है — जो विश्वास, पारस्परिक सम्मान और दीर्घकालिक विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों में भी हम इस महान देश के साथ मिलकर निवेश, नवाचार और विकास करते रहेंगे।”

ताकाहिरो मोरी, वाइस चेयरमैन, निप्पॉन स्टील कॉर्पोरेशन एवं बोर्ड सदस्य, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने कहा: “भारत दीर्घकालिक विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है और इस यात्रा में इस्पात महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमें गर्व है कि निप्पॉन स्टील, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के माध्यम से भारत की इस्पात क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा में योगदान दे रहा है। हम भारत सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हैं और भविष्य को साथ मिलकर आकार देने की आशा करते हैं।”

दिलीप ऊम्मेन, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने कहा: “यह आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के लिए गर्व का क्षण है। यह परियोजना विश्वस्तरीय इस्पात उत्पादन के लिए प्रभावी योजना और सहयोग का प्रतिनिधित्व करती है। यह प्लांट रोजगार उत्पन्न करेगा, सतत विकास को बढ़ावा देगा और उद्योग तथा समुदाय दोनों के विकास को साथ लेकर आगे बढ़ेगा। ‘स्मार्टर स्टील्स ब्राइटर फ्युचर्स’ और ‘बनाऊंगा मैं, बनेगा भारत’ के हमारे संकल्प के साथ, हम इस परियोजना को भारत के दीर्घकालिक औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखते हैं।”

यह प्लांट एक मजबूत पर्यावरण प्रबंधन योजना के तहत विकसित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना, संसाधनों का संरक्षण करना और परियोजना क्षेत्र में जैव विविधता को बढ़ावा देना है, और यह प्रदर्शित करेगा कि आधुनिक इस्पात निर्माण कैसे भारत के डीकार्बोनाइजेशन और ऊर्जा परिवर्तन के मार्ग को गति दे सकता है, साथ ही दीर्घकालिक औद्योगिक विकास का समर्थन कर सकता है। इसके अलावा, कंपनी अपने सामुदायिक विकास कार्यक्रमों का भी विस्तार करेगी, ताकि समावेशी विकास और साझा समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

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