
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईजेड)के वैश्विक विस्तार को बड़ी मजबूती मिली है।श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट स्थित कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल ने पहले ही साल में 10 लाख टीईयूका आंकड़ा पार कर लिया है।यह टर्मिनल अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था।यह कोलंबो पोर्ट का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला टर्मिनल बन गया है।कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनलअब दुनिया के चुनिंदा टर्मिनलों में शामिल है।जिन्होंने पहले साल में ही इतनी बड़ी क्षमता हासिल की।
यह प्रोजेक्ट एपीएसईजेड और जॉन कील्स होल्डिंग्स पीएलसी और श्रीलंका पोर्ट प्राधिकरणकी पार्टनरशिप है।इसमें करीब 800 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है।यह श्रीलंका की प्रमुख पोर्ट प्रोजेक्ट में से एक है।कोलंबो पोर्ट एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ता है।यह एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब है।यह पोर्ट ईस्ट-वेस्ट शिपिंग रूट के बेहद करीब है।इसी वजह से बड़े जहाज यहां आना पसंद करते हैं।आमतौर पर टर्मिनलों को क्षमता बढ़ाने में सालों लगते हैं।लेकिन कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनलने यह काम पहले ही साल में कर दिखाया।
यह कोलंबो का पहला फुली ऑटोमेटेड डीप-वॉटर टर्मिनल है।इसकी क्वे 1,400 मीटर लंबी है।पानी की गहराई करीब 20 मीटर है।यह अल्ट्रा-लार्ज कंटेनर वेसल्स को संभाल सकता है।टर्मिनल की सालाना क्षमता करीब 32 लाखटीईयूहै।इससे कोलंबो की कुल क्षमता बढ़ी है।आधुनिक क्रेन और डिजिटल सिस्टम लगाए गए हैं।
इससे टर्नअराउंड टाइम कम हुआ है।ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ी है।यह उपलब्धि कोलंबो की वैश्विक भूमिका को मजबूत करती है।यहां आने वाला बड़ा कार्गो ट्रांसशिपमेंट का है।इसमें भारत से जुड़ा कार्गो भी अहम है।एपीएसईजेड भारत का सबसे बड़ा निजी पोर्ट नेटवर्क है।यह भारत के करीब 45% कंटेनर कार्गो को संभालता है।कंपनी भारत में 15 पोर्ट और विदेश में 4 पोर्ट चलाती है।जॉन कील्स होल्डिंग्स पीएलसी और श्रीलंका पोर्ट प्राधिकरणके साथ साझेदारी मजबूत है।



