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शॉपी के भारत छोड़ने के निर्णय का कैट ने किया स्वागत 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने शॉपी द्वारा भारत छोड़ने के निर्णय लेने का स्वागत किया है और कहा है कि कोई भी कंपनी जो भारत के संप्रभु कानून का उल्लंघन करेगी और भारत से एकत्र किए गए डेटा का उल्लंघन करेगी, उसको भी शॉपी की तरह भारत छोड़ना पड़ेगा। देश में कई अन्य विदेशी वित्त पोषित कंपनियां हैं जो आदतन भारतीय कानूनों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं और विभिन्न प्रकार की कुप्रथाओं में शामिल हैं , ऐसी कंपनियों को या तो अपने व्यापार करने के तरीके में तुरंत बदलाव लाना चाहिए अन्यथा उनको भी शॉपी की तरह अपना बोरिया बिस्तर बाँध लेना चाहिए -यह कहते हुए कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष  बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री  प्रवीन खंडेलवाल ने शॉपी के भारत से बाहर जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा। कैट ने सबसे पहले 16 सितंबर, 2021 को शॉपी के खिलाफ जोरदार आवाज़ उठाई थे और बाद में वित्त मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के साथ लगातार फॉलो अप भी किया।

भरतिया एवं  खंडेलवाल ने कहा कि कैट ने 16 सितम्बर 2021 को प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा जिसमें एसईए समूह के स्वामित्व वाले शॉपी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी और कहा था की शॉपी जिसमें बड़ी मात्रा में चीनी निवेश है, ने एफडीआई नीति को संशोधित करने वाले प्रेस नोट नंबर 3 (2020) के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इस प्रेस नोट में यह आवश्यक है कि पड़ोसी देशों से भारत (जिनके साथ भारत भूमि सीमा साझा करता है) में किसी भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही दी जाएगी।

एसईए होल्डिंग्स जो शॉपी की होल्डिंग कंपनी है में चीनी कंपनी टेनसेंट का महत्वपूर्ण स्वामित्व (लगभग 25%) है। इसके अलावा, एसईए के संस्थापक, फॉरेस्ट ली मूल रूप से चीनी हैं, लेकिन कुछ साल पहले ही एक देशीयकृत सिंगापुरी बन गए। एसईए डेटा स्टोर करने के लिए टेनसेंट क्लाउड का उपयोग करता है। साथ ही एसईए की गेमिंग सहायक कम्पनी गरेना, टेनसेंट के अधिकांश गेमों को लाइसेंस देती है, जिससे भारी रॉयल्टी मिलती है और निवेश सुनिश्चित करता है कि डेटा पर शॉपी का महत्वपूर्ण नियंत्रण और पहुंच है।

भरतिया एवं  खंडेलवाल ने यह भी कहा कि शोपी के भारत में प्रवेश का अर्थ है भारतीय नागरिकों के डेटा और सुरक्षा से समझौता करना, चीनी सामानों के साथ बाजार की बाढ़, विशेष पहुंच वाले बड़े निर्माताओं के साथ प्रतिस्पर्धा-विरोधी गठजोड़ – ये सभी देश के छोटे व्यापारियों के पेट पर प्रहार करेंगे।

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