धर्म- समाज

संस्कार ही समाज की संस्कृति और जीवन की ऊँचाई का आधार : संत सुधांशु महाराज

दूसरे दिन यज्ञ में दी आहुति, सत्संग प्रेमियों को दिया जीवन-निर्माण का संदेश

सूरत। सिल्क सिटी सूरत में विश्व जागृति मिशन बालाश्रम परिवार द्वारा आयोजित चार दिवसीय भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को पूज्य संत सुधांशु जी महाराज ने यज्ञ में आहुति देकर सभी के सुख, शांति और समृद्ध जीवन की मंगलकामना की।

इसके पश्चात विशाल पंडाल में उपस्थित सत्संग प्रेमियों को संबोधित करते हुए संत सुधांशु जी महाराज ने कहा कि समाज की वास्तविक संस्कृति संस्कारों से निर्मित होती है और यही संस्कार मानव जीवन को ऊँचाई प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध, सावधानीपूर्ण और लक्ष्य के अनुरूप किया गया कर्म ही योग है।

महाराज जी ने कहा कि मनुष्य को जीवन-निर्वाह करते हुए निरंतर कर्मशील रहना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना ही मानव जीवन का उद्देश्य है। ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धिमत्ता और कर्म करने के लिए असीम अवसर प्रदान किए हैं, जिन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए।

उन्होंने संस्कार और संस्कृति के मूल स्तंभ के रूप में सिद्धांतों को बताते हुए शास्त्रों के अनुरूप जीवन जीने पर बल दिया। सिद्धांतों से जुड़ा जीवन आत्मिक उन्नति के साथ-साथ वैचारिक विकास और मानसिक शांति भी प्रदान करता है।

संत सुधांशु जी महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति एक-दूसरे को अपनाने और जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग दिखाती है। उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन-निर्माण के महत्वपूर्ण सूत्र देते हुए उन्होंने संस्कारों से जुड़े रहकर जीवन में उन्नति और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दिया।

इस अवसर पर विश्व जागृति मिशन बालाश्रम के समन्वयक आचार्य रामकुमार पाठक एवं प्रमुख गोविन्द डांगरा ने शहर के सभी श्रद्धालु भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में सत्संग का लाभ लेने की अपील की।

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