सूरत

सूरत: ओलपाड के दांडी बीच पर ‘सीफूड फेस्टिवल’ शुरू, स्वाद और टूरिज्म का अनोखा संगम

20 से 22 फरवरी तक सूरत के लोग पेट्रा पैप्लेट, टाइगर प्रॉन्स और लेविटी जैसे सीफूड का मज़ा लेंगे

सूरत: खाने के शौकीन सूरत के लोगों के लिए 20 से 22 फरवरी, 2026 तक ओलपाड के दांडी बीच पर तीन दिन का एक बड़ा सीफूड फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है। पिछले साल की ज़बरदस्त सफलता के बाद, गुजरात एक्वाकल्चर फीड डीलर्स एसोसिएशन (GAFDA) इस साल और भी जोश के साथ फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है।

‘दांडी सीफूड फेस्टिवल 2026’ 20 फरवरी को शाम 6 बजे दांडी बीच पर गणमान्य लोगों की मौजूदगी में एक उद्घाटन समारोह के साथ शुरू हुआ। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी से पहले यह इवेंट सरसाना कन्वेंशन सेंटर में होता था, जबकि पिछले साल यह सुंवाली बीच पर हुआ था। इस साल दांडी बीच को वेन्यू के तौर पर चुना गया है। पिछले साल 40 स्टॉल लगाए गए थे, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़ाकर 80 कर दी गई है। उत्सव हर दिन शाम 6 बजे शुरू होगा।

इस आयोजन का उद्देश्य “समुद्र तट विकास और रोजगार” को बढ़ावा देना है, जिसके माध्यम से स्थानीय निवासियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। समुद्री भोजन प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण: मेले में झींगा मछली, केकड़ा, बॉम्बे डक और टाइगर झींगे जैसी समुद्री किस्में उपलब्ध होंगी। सूरत के प्रसिद्ध व्यंजन जैसे पात्रा पपलेट, पात्रा तंदूरी और लेविटी का भी आनंद लिया जाएगा।

सूरत के लोकसभा सांसद केशाभाई दलाल इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। उनके साथ गुजरात सरकार के मंत्री ईश्वरभाई पटेल, ओलपाड के विधायक मुकेश पटेल, गुजरात भाजपा उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक झंखना पटेल और मत्स्य आयुक्त विजय खराड़ी (IAS) सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। इसके अलावा SIBA के निदेशक कुलदीपभाई के. लाल, सेलिब्रिटी अतिथि राजदीप सर और अक्षय आनंद, खाद्य उद्योग के उप निदेशक के.आर. पाटनी, मत्स्य निदेशक एम.के. चौधरी, तालुका पंचायत ओलपाड की प्रेसिडेंट नीताबेन प्रीतेशभाई पटेल, साउथ गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स के वाइस प्रेसिडेंट अशोक जीरावाला और कई पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव और सोशल वर्कर मौजूद थे।

ऑर्गनाइज़र ने सूरत और ओलपाड तालुका के सभी नागरिकों, सीनियर सिटिजन और सीफूड पसंद करने वालों को इस फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए बुलाया है। दांडी बीच पर होने वाला यह फेस्टिवल सिर्फ टेस्ट का फेस्टिवल ही नहीं है, बल्कि टूरिज्म, लोकल एम्प्लॉयमेंट और मैरीटाइम इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की एक ज़रूरी पहल भी है।

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