
रेस्क्यू के दौरान वन्यजीव की प्रजाति मिलना दुर्लभ संजोग
उदयपुर ( कांतिलाल मांडोत)। उदयपुर में पिछले कुछ सालों मैं दुर्लभ वन्यजीवों का मिलना काफी खुशी की बात है। आज प्रातः टेकरी स्थित पुलिस लाइन क्वार्टर में देवी लाल के क्वार्टर में एक सांप होने की सूचना वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के अंतरराष्ट्रीय सर्पमित्र एवं पर्यावरण प्रेमी चमन सिंह चौहान को प्राप्त हुई। सूचना पर लक्ष्मी लाल गमेती कोमल गमेती चमन सिंह चौहान मौके पर पहुंचे मौके पर पाया कि कमरे के बाहर पोर्च में एक कोबरा सांप का बच्चा बैठा था। सांप को जैसे ही देखा उसका कलर अलग नजर आया उसका कलर सफेद था क्योंकि चौहान ने यह सांप पहले रेस्क्यू कर रखा था। इसलिए समझने में ज्यादा देर नहीं लगी। यह सांप लियुसिस्टिक यानी सूर्यमखी सांप था।
उल्लेखनीय है कि चमन सिंह चौहान पिछले 22 वर्षों से वन्यजीवों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने इससे पहले भी कई दुर्लभ सांपों का रेस्क्यू किया है। जैसे सफेद कोबरा ,सफेद रेड स्नेक, सफेद प्रिंटेड सांप, सफेद गिलहरी , और सफेद घरेलू चिड़िया हाल ही में सफेद कॉमन किंगफिशर का भी फोटो अपने कैमरे में कैद किए हैं। चौहान ने संवाददाता को बताया कि उदयपुर शहर एवं आसपास के प्रदूषण मुक्त आबोहवा के कारण दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों एवं सरीसृप मिल रहे हैं। चमनसिंह चौहान ने बताया कि जैसे इंसानों में सफेद दाग या पूर्ण सूर्यमुखी होते हैं ,वैसे ही वन्य जीवो में भी यह बीमारी होती है। जो लाखों जानवरों में से एक को होती है और यह कोई बीमारी नहीं है ऐसे जानवरों एवं इंसानों को जीने में कोई तकलीफ नहीं होती और ना ही खाने पीने में।
बस यही है कि ऐसे वन्यजीव ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहते हैं। क्योंकि जंगल में इनको बचना मुश्किल होता है और शिकार का खतरा बढ़ जाता है। वर्ड वाइल्ड एनिमल संस्था के चमनसिंह चौहान का कहना है कि अगर भारत सरकार इन वन्यजीवों को रखने की इजाजत चिड़ियाघर में दे,तो आने वाली कई पीढ़ियों को इन वन्यजीवों को दिखाया जा सकता है और लोगों में जागरूकता लाई जा सकती है।