भारत

भैरोसिंह शेखावत भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए मौजूदा कानून नाकाफी मानते थे

राजस्थान की धरती के लाल भैरोसिंह शेखावत उन गिने चुने नेताओ में एक थे,जो 1952 से चुनाव लड़ते और जीतते रहे थे।वे राजस्थान की पहली विधानसभा से ही चुने जाते रहे थे।भैरोसिंह शेखावत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और हर बार ऐसी स्थिति में बने कि उनकी पार्टी बहुमत से दूर रही,लेकिन राजनैतिक गणित कारगर साबित हुआ। बाबोसा ने उप राष्ट्रपति पद को शोभायमान किया। बाबोसा उप राष्ट्रपति बनने के बाद दलगत राजनीति से तो हटे लेकिन उनकी गिनती सबसे सक्रिय उप राष्ट्रपति के तौर पर की जाती थी। भाजपा के भीतर और बाहर एक सा सम्मान हासिल करने वाले शेखावत भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए मौजूदा कानून नाकाफी मानते थे। वे भ्रष्टाचार उन्मूलन के उपाय हर समय साझा करतें रहते थे। बाबोसा गरीब तबक्के को लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ मानते थे। भैरोसिंह शेखावत चिंतित रहते थे कि राजनीति में सामान्य लोगो का प्रवेश कठिन है। भैरोसिंह उप राष्ट्रपति बने तब विपक्ष ने भी उनका समर्थन किया था। भैरोसिंह अज्ञात शत्रु थे। उनका विपक्ष भी सम्मान करता था।निःस्वार्थ सेवा के पक्षधर ऐसे नेता विरले ही होते है जिनके दिल मे गरीब और गरीबो को देखकर दिल पसीज जाता है।

उनका मानना था कि लोकसभा में मतदाताओ को खुश करने के लिए कई बातें बोलते है। लेकिन राज्यसभा सभा मे ऐसा नही होना चाहिए।राजनीति के अपराधीकरण का, भ्रष्टाचार का सवाल खड़ा होता है। सब चाहते है कि ये दूषण राजनीति में खत्म हो,लेकिन कानून में जो व्यवस्थाएं है जो उनके मुताबिक काफी नही है।दागी मंत्रियों को राजनीति से बाहर करने की कोई व्यवस्था नही है और वे हमेशा इस विषय पर चर्चा करते थे।1952 से ही भ्रष्टाचार पर राजसभा में बाते होती आईं है। बाबोसा मानते थे कि पहले आरोप लगने पर लोग इस्तीफा दे देते थे, लेंकिन अब लोग सवाल खड़े करते है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए चर्चाएं होनी चाहिए।वे इस बात पर जोर देते थे कि संसद में दागी व्यक्ति को रोकने के लिए कानून में क्या उपाय किए जाए।जब तक दागी मंत्री संसद में बैठा होता है तो जनमानस में सरकार के प्रति,संसद के प्रति जो विश्वास और आस्था बननी चाहिए, वह नही बनती।

राजनीति के चाणक्य भैरोसिंह शेखावत दागी मंत्री को टिकट देने के पक्ष में नही रहते थे। वे चाहते थे कि ठोक बजाकर टिकट देना चाहिए। अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति चुनाव जीतकर राजनीति में आए। राजस्थान विधानसभा में भैरोसिंह शेखावत के संबंध अच्छे थे। कोई उनकी बुराई नही चाहता था। विपक्ष में बैठी कांग्रेस के नेता भी भैरोसिंह शेखावत का दिल से सम्मान देते थे।वे राष्ट्रपति के पद पर पहुंचे और सामंजस्य की राजनीति की दिशा में आगे बढे। सामंजस्य के बिना देश की तरक्की नही हो सकती है। साफ सुथरी छबि के धनी का राजनैतिक करियर भी क्लियर था जीवन मे कभी आरोप लगना तो दूर कोई सोच भी नही सकता था। अंत तक अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।राष्ट्पति के पदेन सभापति थे और उनकी जिम्मेदारी कोई कम नही थी। उदयपुर जिले के सायरा पंचायत समिति के पदराडा अस्पताल का उद्घाटन भैरोसिंह शेखावत के हाथों हुआ। उस दौरान वे राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद पर थे।

गहरीलाल जैन के पुत्र की स्मृति में बनाया गया अस्पताल आज क्षेत्र के हर गांव के लोगो का उपचार किया जा रहा है। भैरोसिंह शेखावत लोकतंत्र के इन चार स्तंभ विधायिका,न्यायपालिका, कार्यपालिका और प्रेस के बाद एक और गरीब तबके को पांचवा स्तंभ मानते थे। नीतियां बनाते वक्त गरीबो का भी ध्यान रखना चाहिए। उनके मन मे हर समय टसक रहती थी। वे कहते थे गोदाम भर लिए,अनाज का उत्पादन बढ़ा लिया फिर भी लोग भूख से मर रहे है और आत्महत्या करता है तो वह बहुत बड़ा अभिशाप है। जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगे उसके पक्षधर थे। वे जनसभाओं में संजय गांधी की खुलकर प्रशंसा करते थे संजय गांधी का पँचसूत्रीय कार्यक्रम नॉकरशाही की उत्पीडात्मक की कार्यवाइयों की वजह से अलोकप्रिय नही हुआ होता तो देश की अनेक समस्याओं का समाधान हो जाता। जनसंख्या इसलिए होती है कि गरीब यह सोच लेता है कि जितने बच्चे होंगे उतने ज्यादा काम करने वाले होंगे।

वे मानते थे कि गोदाम भरे होने से क्या फायदा है जब गरीब का पेट ही खाली है। डिलेवरी सिस्टम में हर सरकार को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का अभाव है।देश की सरकारों को बदलने का काम ये दो वर्ग ही करते है। शेखावत ने बदले की भावना से कोई काम नही किया। उंन्होने दोस्त बनाने का ही काम किया था।इसलिए उन्हें अज्ञात शत्रु कहा जाता था।

मजहब,जाति,भाषा और दूसरा कोई मुद्धा जो देश की एकता और अखंडता के लिए समस्या बन सकता है वह न्याय संगत नही हो सकता है। हरफनमौला भैरोसिंह शेखावत का राजनीतिक सफर सुखद और उद्देश्य पूर्ण रहा था। वो हमारे बीच नही है लेकिन उनके मिठास भरे बोल आज भी लोगो के जेहन में है और वो कभी विस्मृत नही होंगे।

( कांतिलाल मांडोत )

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button