भारत

इन्दिरा गांधी के पास भारत के लिए एक सपना था

इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष

इंदिरा गांधी का जन्म मोतीलाल नेहरू के घर हुआ।भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय सदस्य और भारत के घर इंदिरा का जन्म हुआ। इंदिरा में देशभक्ति की भावना थी। 1959 में इंदिरा गांधी को नेशनल कांग्रेस का प्रेसिडेंट चुना गया था। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी ने चुनाव लडने की इच्छा जाहिर की गई। 1966 में लालबहादुर शास्त्री की ताशकंद में दुर्घटना में मौत के बाद इंदिरा गांधी देश की पहली प्रधानमंत्री बनाई गई। 1966 से 1984 तक उनकी हत्या तक प्रधानमंत्री रही।

देश के पहले आम चुनाव में इंदिरा अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र फूलपुर में और अपने पति फिरोज गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली में अनधिकृत प्रचारक प्रबंधन थी। इंदिरा गांधी ने जमकर काम किया। जब उन्होंने अपने दिवंगत पति के निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ा तो वे प्रधानमंत्री बन चुकी थी। वे जनमानस की जादूगरनी थी। इंदिरा गांधी भीड़ खींचने के मामले में वे अपने पिता से भी ज्यादा आकर्षक लगती थी। इसमें कोई दोहराय नही है कि उन्होंने मतदाताओ के दिलो में जगह बनाई। उनको इंदु और प्रियदर्शिनी के नाम से भी संबोधित करते थे। गांवो में कांग्रेस को हाथ वाली सरकार से जानते थे। लोग इंदिरा गांधी के नाम पर मोहर लगाते थे। भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली इंदिरा गांधी का विदेशी धरती पर भी इतना ही मान सम्मान था जितना भारत मे था। गांवो में इंदिरा को देवी के नाम से संबोधित करते थे।

राजनैतिक परिद्रश्य में इंदिरा इतनी होशियार थी कि उनकी शख्शियत को केवल नेहरू की आभा तक ही सीमित नही किया जा सकता था। इंदिरा गांधी पूरे देश को परिवार मानती थी।उन्होंने वास्तव में परिवार का वास्ता दिया लेकिन उनका परिवार सीमित नही था। मेरा परिवार चंद लोगो तक सीमित नही है।इसमें करोडो लोग शामिल है।आपको परेशानिया अपेक्षा कृत कम है।क्योंकि आपके परिवार सीमित और छोटे है। लेकिन मेरी समस्या कई गुना बड़ी है क्योकि मेरे परिवार के करोडो लोग गरीब है और मुझे उनकी देखभाल करनी पड़ती है। क्योंकि वे विभिन्न जातियों और धर्मो से ताल्लुक रखे है। इसलिए वे कभी कभी आपस मे लड़ते है और मुझे हस्तक्षेप करना पड़ता है।ख़ासकर कमजोर सदस्यों को बचाने के लिए ताकि शक्तिशाली सदस्य उनकी कमजोरी का फायदा नही उठा सके।

उदयपुर जिले के गोगुन्दा में इंदिरा गांधी का आगमन हुआ। उस दौरान अपने भाषण के दौरान नान्देशमा के तत्कालीन सरपंच चुनीलाल शर्मा के नाम का संबोधन किया और कहा कि मैं कांग्रेस के कार्यकर्ता और मौजूदा सरपंच चुनीलाल शर्मा को मंच पर आमंत्रित करना चाहती हूँ। वो मंच पर सादर आमंत्रित है। वो कांग्रेस के बैनर तले लंबे समय से सेवा दे रहे है। उल्लेखनीय है कि चुनीलाल शर्मा ने नान्देशमा में कांग्रेस में 36 वर्षो तक काम किया और सरपंच का पद शोभायमान किया। इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के कार्यकर्ता और कांग्रेस में लंबे समय तक सेवा देने वाले चूनीलाल शर्मा को मंच से उनके कार्यो की प्रशंसा की गई।
इंदिरा भले ही भारत माता का मिथक रचने में कामयाब रही हो,लेकिन उनकी पार्टी को 282 सीटों पर विजयी मिली। इंदिरा ने सिंडीकेट के चालक बूढो को मात देकर पूरब के महान महिला प्रमुख के तौर पर इंदिरा पंथ के लिए मंच तैयार किया। 1971 का आम चुनाव समय से एक साल पहले कराया गया और उनकी पार्टी ने 325 सीटों पर विजय प्राप्त की। यह इंदिरा को लेकर जनमत संग्रह था। गरीबी हटाओ के नारे से विस्मयजनक प्रतिक्रिया और प्रशंसा प्राप्ति के अनिश्चित मुकाम पर पहुंच गई।

26 जनवरी 1975 को उंन्होने राष्ट्र के नाम प्रसारण में कहा,राष्ट्रपति ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी है।इसमें घबराट की कोई आवश्यकता नही है। माँ बेटे के संयुक्त उपक्रम के तहत भारत को सुधारने के लिए 25 सूत्री कार्यक्रम शुरू किया। जहा निरक्षरता और दहेज के लिए कोई जगह नही थी। 1977 में इस पर आपत्ति जताई और पार्टी के साथ साथ परिवार भी हार गया और सत्ता से बाहर कर दिया गया।

पहली गैर कांग्रेसी सरकार को लेकर भारत के कटु अनुभव से गांधी ब्रांड की अपरिहार्यता बढ़ गई। 1980 में इंदिरा गांधी पहले से ज्यादा महिमा के साथ सत्ता में लौटी। उन्हें मिली 351 सीटों में से सौ से अधिक संजय के वफादार थे।अखिल भारतीय कांग्रेस के नवनियुक्त महा सचिव के रूप में वे पहले की ही तरह संविधानेतर सत्ता के केंद्र में थे और उनका प्रभाव ज्यादा बढ़ गया।

इंदिरा गांधी ने निधन के बाद प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी आसानी से भारत के दिल मे प्रवेश कर गए। नए प्रधानमंत्री ने देश को बताया। इंदिरा गांधी का देहांत हो गया है। लेकिन उनकी आत्मा जिंदा है। भारत अमर है। भारत की भावना अमर है।उनका एक सपना था मैं एक ऐसे भारत का सपना देखता हूँ जो मजबूत,आत्मनिर्भर और स्वतंत्र और दुनिया मे अग्रणी हो। यह सपना अल्पआयु में ही टूट गया और कांग्रेसियों के लंबे अरसे तक गुहार करने के बावजूद सोनिया ने भारत ने पथम विधवा की भूमिका से बढ़ी भूमिका ओढ़ने से इंकार कर दिया।

सोनिया ने प्रधानमंत्री के पद को ठुकरा कर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बना दिए गए। सोनिया गांधी के इस त्याग की पूरी दुनिया नोटिस की और सोनिया को त्याग की देवी से संबोधित किया गया। भारत मे गांधी परिवार के इन दो दिग्गजों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया।इंदिरा ने किए गए देश के कार्यो और उनके बलिदान को देश का जनमानस कोटि कोटि वंदन करता है।

( कांतिलाल मांडोत )

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