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कैट ने अमित शाह से भारत में खुदरा व्यापार के लिए एक सहकारी मॉडल लागू करने का आग्रह किया

भारत में सहकारी आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुसरण में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश के व्यापारिक समुदाय के बीच भारत में आक्रामक रूप से सहकारी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मामलों और सहकारिता मंत्री अमित शाह को आज भेजे गए एक पत्र में कैट ने सरकार के साथ मिल कर सहकारी मॉडल को भारत में व्यापार के भविष्य के मॉडल के रूप में अपनाने और स्वीकार करने की दिशा में कार्य करने का सुझाव और भरोसा दिया है।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भारतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारत में खुदरा व्यापार विदेशी निवेश वाली वैश्विक कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट घरानों के वर्चस्व और एकाधिकार नीतियों के कारण संकट में है जिसने व्यापार में एक असमानता को बढ़ावा दिया है जिससे सीमित पूंजी और संसाधनों के कारण व्यापारी इन बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनकी क्रय शक्ति बेहद सीमित है। ये बड़ी कंपनियाँ खुदरा व्यापार पर कब्जा करने और एकाधिकार साबित करने के लिए अपनी कुरीतियों के साथ पारंपरिक खुदरा व्यापार को उखाड़ फेंकने में अपनी सारी ताकत झोंक रही हैं। भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए,व्यापार का एक सहकारी मॉडल सबसे अच्छा विकल्प है, बशर्ते इसे सरकार द्वारा समर्थित नीतियों से मजबूत किया जाए।

भरतिया एवं खंडेलवाल ने सुझाव दिया कि सहकारी मॉडल के तहत, सरकार एक क्लस्टर योजना शुरू कर सकती है जिसमें विभिन्न व्यापारी एक साथ मिल कर अपने संसाधनों, पूंजी, प्रौद्योगिकी और विपणन को एक दूसरे से सांझा कर सकते हैं और खुद को एक इकाई बनाकर अपनी क्रय शक्ति बढ़ा सकते हैं जिससे वे किसी के साथ भी प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों। ऐसा परिदृश्य उपभोक्ताओं के हित में भी होगा क्योंकि उनके पास प्रतिस्पर्धी कीमतों और सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले सामानों के साथ उत्पादों का व्यापक विकल्प होगा। इस तरह की सहकारी नीति को कृषि उत्पादों, एफएमसीजी सामान, उपभोक्ता सहित खुदरा व्यापार के सभी कार्यक्षेत्रों, तक बढ़ाया जा सकता है।

हाल ही में खंडेलवाल के नेतृत्व में कैट के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात के नवसारी जिले में वलसाड नवसारी जिला फाल और शाकभाजी सहकारी संघ लिमिटेड के कृषि खाद्य परिसर का दौरा किया, जो प्राकृतिक प्रसंस्कृत डिब्बाबंद मैंगो पल्प, अचार, केचप और अन्य कृषि-खाद्य पदार्थों का उत्पादन करने वाले 55 हजार किसानों की एक अच्छी तरह से स्थापित सहकारी है। यह सहकारी एक छतरी के नीचे इन-हाउस कैनिंग, रैपलिंग, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड प्रोसेस, हीट प्रोसेस, पैकेजिंग आदि से लैस है और न केवल घरेलू बाजार बल्कि निर्यात बाजार को भी अच्छी गुणवत्ता वाले सामान का उत्पादन करता है।

हालाँकि, इस तरह के सहकारी को पूंजी की उपलब्धता और परिवहन की उच्च लागत जैसी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यद्यपि वे मौसमी आधार पर कृषि वस्तुओं का उत्पादन करते हैं, यदि सहायता दी जाती है, तो ऐसी सहकारी समितियाँ अपनी भंडारण क्षमता को बढ़ाकर पूरे वर्ष माल का उत्पादन कर सकती हैं। कृषि उत्पादों की दृष्टि से फसलों को सुरक्षा कवच प्रदान करना भी आवश्यक है।

नवसारी जैसे सहकारी परिसर में व्याप्त स्थिति का संज्ञान लेते हुए भरतिया एवं खंडेलवाल को लगता है कि देश भर में एक मजबूत और अच्छी तरह से परिभाषित सहकारी नीति के तहत विशेष सहकारी पार्क विकसित करने की आवश्यकता है जिसमें विभिन्न आवश्यक तत्व होंकरों में छूट के संदर्भ में प्रोत्साहन, कम ब्याज दरों पर पूंजी की आसान उपलब्धता, तकनीकी जानकारी प्रदान करना, जहां कहीं भी इसकी आवश्यकता हो, खुदरा व्यापार के सभी क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को व्यापार की सहकारी पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

हम यह भी सुझाव देते हैं कि सहकारी आंदोलन के तहत एक साथ हाथ मिलाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए एक विशेष सहकारी पार्क विकसित किया जा सकता है। इन पार्कों में खेत से लेकर उपभोक्ताओं तक सभी सुविधाएं होनी चाहिए जिससे वे उत्पाद की लागत कम कर सकें। वहीं इन पार्कों को इन हाउस बैंकिंग व अन्य सुविधाओं के अलावा सभी आवश्यक सरकारी सुविधाओं की वन विंडो सुविधाओं से लैस किया जाए। इस प्रकार के सहकारी पार्क देश के खुदरा व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने में एक बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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