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उद्योगपतियों को बिजली में सब्सिडी की छूट बनी लूट, मामले की जांच के लिए सरकार ने गठित की जांच समिति

मुंबई। विदर्भ, मराठवाडा और डी-ग्रेड व डी-प्लस जिलों में उद्योगपतियों को सरकार बिजली में सब्सिडी दे रही थी ,उसमें घोटाला सामने आया था। जिसकी जांच के लिए सरकार ने महावितरण के निदेशक (वाणिज्य) डॉ मुरहरी केले की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। समिति में निदेशक (परिचालन) संजय ताकसांडे को भी शामिल किया गया है।

15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। साथ ही उनसे रिकवरी करने के लिए कहा है। इस आदेश के बाद बिजली सब्सिडी लुटेरों की नींद हराम हो गई है। इससे बचने के लिए वे मंत्रालय से लेकर सरकारी निवास स्थान सहयाद्री और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सागर बंगलों तक लगातार चक्कर लगा रहे हैं।

विदर्भ, मराठवाड़ा सहित औद्योगिक तौर पर पिछड़े जिलों में उद्योग लगाने वाले उद्योगपतियों को सन 2016 में तत्कालीन फडणवीस सरकार ने 1200 करोड़ रुपये सालाना बिजली सब्सिडी देने का निर्णय लिया था। छूट का फायदा चंद उद्योगपतियों को ही मिल सके, इसके लिए उस वक्त बाकायदा रणनीति बनाई गई। रणनीति बनाने वाले अपने मिशन में कामयाब हो गए। हुआ यह कि उस क्षेत्र के महज चंद उद्योगपति ही सब्सिडी की 1200 करोड़ रुपये रकम में से 65 फीसदी वे ही उड़ा ले गए।

बाकी उद्योगपति सब्सिडी का इंतजार करते थे, पर उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता था। कई सालों तक ऐसा ही चलता रहा। बिजली सब्सिडी की लूट पर लगाम लगाने के लिए कई बिजली उपभोक्ता संगठनों व जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मुलाकात की। उन्हें प्रजेंटेशन दिया। जाने माने वकील विनोद सिंह ने अदालत में जनहित याचिका भी दाखिल किया गया। उनकी सुनवाई चल रही है।

सब्सिडी पर लगाम लगाई

ठाकरे सरकार में उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री अजित पवार की दखल के बाद तत्कालीन ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने बिजली छूट नीति में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी विजय सिंघल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर सब्सिडी के लिए नए नियम बनाए गए। 23 जून 2022 को शासनादेश जारी कर सब्सिडी के लिए अधिकतम सीमा 20 करोड़ निर्धारित कर दिया था। इसके पहले कुछ खास उद्योगपति 100 से 200 करोड़ रुपये तक की बिजली सब्सिडी उड़ा रहे थे। करीब छह साल में 7200 करोड़ रुपये की छूट का फायदा उद्योगपतियों ने लिया।

सब्सिडी लेने के लिए गलत तरीके अपनाए, सरकार ने माना

महावितरण ने 19 जुलाई को आदेश जारी कर कहा कि 1 अप्रैल 2016 के बाद जिन उद्योगपतियों ने बिजली सब्सिडी का फायदा लिया है वे अपने कागजात जमा कराए। आदेश में यह स्वीकार किया गया है कि कुछ उद्योगपतियों ने बिजली सब्सिडी का फायदा लेने के लिए गलत तरीके अपनाए हैं। जैसे पुराना बिजली कनेक्शन कटवा कर नया कनेक्शन लिया, कुछ ने कंपनी का नाम बदल कर बिजली सब्सिडी ली है। ऐसे कई कारण गिनाए गए हैं। महावितरण के आदेश के बाद छूट की लूट करने वाले उद्योगपति बचने के लिए तरीके खोज रहे हैं। दलालों, नेताओं और अधिकारियों के यहां पर सुबह से लेकर शाम तक बैठक कर बचने के तरीके खोज रहे हैं।

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