पर्यावरण के महत्व को दर्शाता है हरियाली अमावस्या का पर्व

कांतिलाल मांडोत
आज हरियाली अमावस्या का बहुत बड़ा दिन है।सावन का महीना धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण महीना सावन का महीना है।शिव भक्तों के लिए उत्साहवर्धक दिन है।हर हर महादेव और बम बम
भोले के नाद से शिवालय गूंज ऊठे है।सोमवार से सावन महीने का विधिवत प्रारंभ हो जाएगा।भक्तो के उपवास और पूजा अर्चना के लिए जड़ी लगेगी।इस रंगारंग शुरुआत के साथ ही आकर्षक श्रृंगारित प्रतिमा के दर्शन होंगे।सावन महीने में कोरोना की महामारी को देखते हुए सोशल डिस्टेंस की तैयारिया होने जरूरी है।अलबत्ता, आज हरियाली अमावस्या का दिन हिन्दू धर्म मे विशेष महत्व है।आज भगवान शिव की आराधना धूमधाम से की जा रही है।आज पूर्वजो के निमित पिंडदान और दान पुण्य की महिमा है।हरियाली अमावस्या का पर्व जीवन मे पर्यावरण के महत्व को दर्शाता है।आज शिव मंदिरों में भक्तो की कतार देखने को मिल रही है।शिवालयों में पँचवक्र, रुद्राभिषेक,शिवमानस पूजा और पुष्पांजलि सहित की पूजा अर्चना का दौर सुबह से शुरू हो गया है।आज पर्यावरण की महत्ता को बढ़ाने के लिए क्षेत्र में पौधरोपण भी किया जाएगा।शास्त्रोक्त मान्यता है कि पौधरोपण करने से सारे दुख दर्द दूर हो जाते है।
सुख समृद्धि का आगमन होता है।आज की तिथि किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।आज किसान अपने खेतों में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा करेंगे।ईश्वर से अच्छी फसल होने की कामना करेंगे।आज गंगा जल से स्नान कर सूर्य देव को अर्ध्य देने के बाद पितरों को तर्पण करने का भी महत्वपूर्ण दिन है। आज कई लोग उपवास भी रखे है।आज सुबह लोगो ने दान दक्षिणा देकर पुण्य उपार्जन किया है।शाम सात बजे तक अमावस्या है।जोकि शाम तक पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेने का अवसर है।आज भक्तो ने पीपल और तुलसी की पूजा की गई।आज तुलसी,पीपल,बरगद,केला और नींबू का रोपण कर पर्यावरण के महत्व को दर्शाना चाहिए।जिसे युवा पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति आस्था गहरी हो सके।
दान की दृष्टि से किसी तालाब पर,कुएं और बावड़ी पर जाकर मछलियों को आटा की गोलियां बनाकर खिला सकते है।यह पुण्य का कार्य है।पवित्र सावन महीने में पूजा पाठ के साथ महिलाएं और युवतियां कथाश्रवन का महत्व है।मंदिरों में ज्यादा भीड़ नही
हो,उसके लिए भी ध्यान रखा जाना चाहिए।क्योकि कोरोना अभी गया नही है।सावन महीने के इस बार पांच सोमवार है।नतीज़तन, उसके अनुरूप तैयारियां की जा रही है।गांवो में भीड़ नियंत्रण होती है,लेकिन उदयपुर में शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा के लिए महिलाओं और पुरुषों की कतारें लगती है।इस पर कोरोना की गाइड लाइन का पालन हर हाल में करना है कोरोना गया नही है।यह छुपारुस्तम है।
कोरोना के कारण मंदिरों में दर्शन लाभ लेकर भक्तो को ज्यादा नही रुकना चाहिए।आज से पेड़ पौधों को नया जीवन मिलता है।इनकी वजह से मानव जीवन सुरक्षित रहता है।इसलिए प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी हरियाली अमावस्या का बहुत बड़ा महत्व है।शाश्त्रो और पुराणों में यह कहा गया है कि आज पौधरोपण करने से पितृ दोष ,ग्रह दोष निवारण होता है।आज सभी को संकल्प करना है कि पीपल,बरगद,बेल,नीम आम, आँवला आदि के पौधे में से कोई भी एक पौधरोपण कर प्रकृति का कर्ज चुकता करूंगा।

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