सूरत

चेक रिटर्न मामले में आरोपी को एक साल की कैद

सूरत की द्वितीय अतिरिक्त सिविल जज एवं ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। यह मामला शिकायतकर्ता संजिवकुमार देसराज तनेजा (प्रोप्राइटर, देसराज एंड संस) द्वारा दर्ज कराया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कपड़ा व्यापार के लेनदेन के दौरान आरोपी मुकुेश कुमार (प्रोप्राइटर, सनी फैशन, अंबाला सिटी, हरियाणा) ने बकाया भुगतान के आंशिक भुगतान के रूप में ₹17,16,000 का चेक जारी किया था।

शिकायत के अनुसार व्यापारिक लेनदेन में कुल लगभग ₹41,34,207 की राशि बकाया थी। आरोपी द्वारा दिया गया चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर “फंड्स इनसफिशिएंट” (पर्याप्त राशि न होने) के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित समय में भुगतान नहीं किए जाने पर अदालत में मामला दायर किया गया।

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी ने अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया और चेक पर हस्ताक्षर से भी इंकार नहीं किया। सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता सचिन घुगे की दलीलों को कोर्ट ने स्वीकार किया। अदालत ने अपने फैसले में आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है तथा शिकायतकर्ता को ₹17,16,000 मुआवजा 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है। यदि आरोपी निर्धारित समय में यह राशि अदा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त तीन माह की साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। साथ ही अदालत ने आरोपी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने का भी आदेश दिया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button