सूरत

सूरत : परवत पाटिया में खाड़ी बाढ़ पर फूटा लोगों का गुस्सा, SMC के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

दो बार घरों में घुसा पानी, लाखों का नुकसान; स्थायी समाधान नहीं मिला तो भूख हड़ताल और उग्र आंदोलन की चेतावनी

सूरत। सूरत शहर में मानसून की शुरुआत के साथ ही खाड़ी बाढ़ की समस्या ने एक बार फिर परवत पाटिया क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जुलाई 2026 में एक ही महीने में दूसरी बार बाढ़ का पानी घरों में घुसने से स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित नागरिकों ने “SMC हाय-हाय” के नारे लगाते हुए सूरत महानगरपालिका की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे भूख हड़ताल और उग्र आंदोलन करेंगे।

आधे घंटे की बारिश ने डुबोए घर और वाहन

परवत पाटिया के ऋषि विहार, सत्यम, शिवम, सुंदरम, माधवबाग, नंदनवन, वृंदावन, श्री वर्धन रो-हाउस, रणछोड़ नगर, शांतिनगर, गणेश नगर और एसके नगर सहित कई सोसायटियां बाढ़ के पानी में डूब गईं। महज आधे घंटे में पार्किंग से लेकर घरों के भीतर तक पानी भर गया, जिससे लोगों को सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने का भी मौका नहीं मिला। घरों में रखा इलेक्ट्रॉनिक सामान, अनाज और अन्य कीमती वस्तुएं खराब हो गईं, जबकि कई महंगी कारें और दोपहिया वाहन भी पानी में डूबने से क्षतिग्रस्त हो गए।

‘राहत सामग्री नहीं, स्थायी समाधान चाहिए’

स्थानीय निवासी  ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे राहत सामग्री या दूध के पैकेट नहीं चाहते, बल्कि खाड़ी बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। उनका कहना था कि पिछले 10 वर्षों से हर मानसून में यही स्थिति बनती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अरबों रुपये के बजट वाली सूरत महानगरपालिका आखिर यह धन कहां खर्च कर रही है। उन्होंने स्मार्ट सिटी के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब घरों के बाहर कीचड़ और गंदगी फैली हो तो बच्चों और बुजुर्गों का जीवन कैसे सुरक्षित रहेगा।

घरों में चार फीट पानी, सांपों का खतरा और बीमारी का डर

एक अन्य स्थानीय निवासी महिला ने बताया कि घरों में चार-चार फीट तक पानी भर गया है। बाढ़ के साथ सांप और अन्य जहरीले जीव भी घरों में घुस रहे हैं। पीने के स्वच्छ पानी की कमी और गंदगी के कारण बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के रोजगार और कारखाने बर्बाद हो गए, लेकिन अब तक कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनकी स्थिति देखने तक नहीं पहुंचा।

वालक खाड़ी डायवर्ट करने के फैसले पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खाड़ी किनारे बनी टेक्सटाइल मार्केटों और कथित अतिक्रमणों के खिलाफ प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि वालक खाड़ी को डायवर्ट करने के प्रशासनिक फैसले के कारण आधे सूरत को खाड़ी बाढ़ की समस्या झेलनी पड़ रही है। लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर योजना का परिणाम बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

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