
सद्भावना वृद्धाश्रम को “मावतर चाहिए”
सूरत ४ मई २०२६ : वृद्धाश्रम भारतीय संस्कृति नहीं है, लेकिन आज के कलियुग की आवश्यकता अवश्य है। दुर्भाग्यवश संयुक्त परिवार व्यवस्था टूटने से कई लोग निराधार हो रहे हैं। राजकोट में पिछले 10 वर्षों से “विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर” सद्भावना वृद्धाश्रम संचालित किया जा रहा है। इस वृद्धाश्रम में जाति, धर्म या किसी भी भेदभाव के बिना जरूरतमंद वृद्धों को संस्था के नियमों के अनुसार सम्मानपूर्वक प्रवेश देकर सभी सुविधाएँ नि:शुल्क प्रदान की जाती हैं। वृद्धाश्रम में प्रवेश लेने वाले व्यक्तियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। 500 करोड़ की लागत से 1400 कमरों में 5000 वृद्धों के लिए यह नया परिसर बनाया जा रहा है, जहाँ 7 टावर होंगे और प्रत्येक टावर में 11 मंजिलें होंगी। जैन समाज के वृद्धों के लिए अलग टावर बनाया गया है जिसमें मंदिर (देरासर) भी होगा।
सद्भावना वृद्धाश्रम एक विशेष संस्था है जो नि:संतान, निराधार, बिस्तर पर आश्रित, कैंसर तथा कोमा से ग्रस्त वृद्धों को सम्मानपूर्वक जीवनभर नि:शुल्क सेवा प्रदान करने के लिए समर्पित है। 30 एकड़ के शांत वातावरण में यह एक स्वर्ग समान स्थान है जहाँ वृद्ध प्रकृति की गोद में शांति प्राप्त कर सकते हैं।
यहाँ 24×7 चिकित्सा सेवा, व्यक्तिगत देखभाल और प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा परिवार जैसा स्नेहपूर्ण वातावरण प्रदान किया जाएगा। सेवाओं में आरामदायक आवास, स्वास्थ्य जांच, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आध्यात्मिक गतिविधियाँ शामिल हैं।
यह केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा घर है जहाँ वृद्ध सम्मान, प्रेम और सुरक्षा के साथ जीवन जी सकते हैं। यहाँ मंदिर, फिजियोथेरेपी सेंटर, लाइब्रेरी, गेम रूम और ऑडिटोरियम जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
सद्भावना वृद्धाश्रम केवल देखभाल नहीं करता, बल्कि प्रेम, सम्मान और अपनापन देता है। वर्तमान में गुजरात के इस सबसे बड़े वृद्धाश्रम में 700+ वृद्ध रह रहे हैं, जिनमें से 260 बिस्तर पर आश्रित हैं। यदि आपके आसपास कोई निराधार, असहाय, बीमार, बिस्तर पर आश्रित, कैंसर या कोमा से ग्रस्त व्यक्ति हो, तो उन्हें विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर, सद्भावना वृद्धाश्रम, राजकोट-जामनगर हाईवे, पध्धरी के पास, मोटा रामपर, राजकोट तक पहुँचाने की अपील की जाती है।



