धर्म- समाज

भद्रा का भय नहीं, शास्त्रीय परंपरा को समझें 28 अगस्त को मनाएं रक्षा बंधन

भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, विश्वास और जीवनभर एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की भावना का प्रतीक रक्षा बंधन पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह लगभग 09:08–09:10 बजे प्रारंभ होकर 28 अगस्त को सुबह लगभग 09:48–09:50 बजे तक रहेगी। पंचांग परंपरा के अनुसार 27 अगस्त को पूर्णिमा के साथ भद्रा रहने के कारण उस दिन राखी बांधने से बचने और 28 अगस्त को पूर्णिमा के दौरान रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है।

भद्रा आखिर है क्या और इसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल क्यों नहीं माना जाता ?

भद्रा को ज्योतिष एवं पंचांग में विष्टि करण कहा जाता है। हिंदू पंचांग में प्रत्येक तिथि के दो भाग होते हैं, जिन्हें करण कहा जाता है और 11 करणों में विष्टि करण को भद्रा के नाम से जाना जाता है। इसलिए भद्रा कोई ग्रह, बीमारी, अदृश्य संकट या कोई ऐसी शक्ति नहीं है जिससे डरने की आवश्यकता हो, बल्कि यह पंचांग की एक विशेष कालावधि है। मुहूर्त शास्त्र की परंपरा में विष्टि करण का स्वभाव अपेक्षाकृत उग्र एवं कठोर माना गया है, इसलिए विवाह, गृहप्रवेश, मांगलिक संस्कार तथा रक्षा बंधन जैसे सौम्य एवं शुभ कार्यों को भद्रा में करने से सामान्यतः बचने की परंपरा रही है।

भद्रा को लेकर डर नहीं, सही समझ जरूरी

भद्रा के संबंध में शास्त्रीय एवं पौराणिक परंपराओं में अनेक प्रसंग मिलते हैं। भद्रा की स्थिति को कभी-कभी स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल लोक से जोड़कर भी बताया जाता है। यह ज्योतिषीय गणना एवं पारंपरिक शब्दावली का हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं कि भद्रा के समय निश्चित रूप से कोई अनिष्ट होने वाला है। इसी प्रकार यह कहना भी उचित नहीं कि भद्रा में राखी बांधने से भाई की उम्र निश्चित रूप से कम होगी या जीवन में कोई संकट आ जाएगा। धार्मिक परंपरा का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि शुभ कार्य के लिए अनुकूल समय चुनना है। इसलिए भद्रा को श्रद्धा और शास्त्रीय परंपरा के साथ समझना चाहिए, भय के रूप में नहीं।

27 अगस्त को पूर्णिमा होते हुए भी रक्षा बंधन क्यों नहीं ?

इस वर्ष पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह प्रारंभ हो रही है, लेकिन पंचांग गणना के अनुसार उस दिन भद्रा का प्रभाव रहने के कारण रक्षा सूत्र बांधने के लिए उपयुक्त समय नहीं माना गया है। उपलब्ध पंचांग गणनाओं में भद्रा 27 अगस्त की रात लगभग 09:30–09:34 बजे तक बताई गई है। इसके बाद 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा विद्यमान रहती है और भद्रा समाप्त हो चुकी होती है। इसी कारण रक्षा बंधन का मुख्य पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय

28 अगस्त की सुबह पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहने तथा भद्रा समाप्त हो जाने के कारण प्रचलित पंचांग गणनाओं में सूर्योदय से पूर्णिमा समाप्त होने तक का समय रक्षा सूत्र बांधने के लिए उपयुक्त माना गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण स्थानीय मुहूर्त भी कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। उदाहरण के लिए नई दिल्ली की गणना में राखी बांधने का समय लगभग सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक दिया गया है।

रक्षा बंधन का वास्तविक संदेश

रक्षा बंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने की रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, सम्मान, विश्वास और जिम्मेदारी को मजबूत करने का पर्व है। बहन भाई के सुख, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की मंगलकामना करती है और भाई भी बहन के सम्मान, सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का संकल्प व्यक्त करता है। आज के समय में इस पर्व का संदेश और भी व्यापक है रिश्तों में अधिकार से अधिक सम्मान, औपचारिकता से अधिक अपनापन और रस्म से अधिक भावनाओं का महत्व है।

इसलिए इस रक्षा बंधन पर भद्रा से डरने के बजाय उसकी शास्त्रीय मान्यता को समझें, शुभ समय का पालन करें और भाई-बहन के इस खूबसूरत रिश्ते को प्रेम, विश्वास और आत्मीयता के साथ मनाएं।

गोविंद मूंदड़ा ( ज्योतिष एवं वास्तु हस्तरेखा विशेषज्ञ )

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button