धर्म- समाज

श्रावण तीज से पहले राजस्थान की संस्कृति से सराबोर हुआ सूरत

राजस्थान फाउंडेशन सूरत चैप्टर एवं माहेश्वरी महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में भव्य सांस्कृतिक आयोजन, 500 मातृशक्ति ने लिया भाग

सूरत। श्रावण मास की तीज के पावन पर्व से पूर्व सूरत में राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों की मनोहारी झलक देखने को मिली। राजस्थान फाउंडेशन सूरत चैप्टर एवं माहेश्वरी महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में करीब 500 मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। राजस्थानी वेशभूषा, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पूरा माहौल राजस्थानमय हो गया।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक राजस्थानी परिधान में सज-धजकर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। लोक संस्कृति, तीज पर्व की परंपराओं और राजस्थान के पारंपरिक रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। महिलाओं के उत्साह और उमंग ने आयोजन को यादगार बना दिया।

इस अवसर पर राजस्थान फाउंडेशन सूरत चैप्टर के अध्यक्ष श्याम राठी ने कहा कि सूरत की धरती पर समय-समय पर मारवाड़ी एवं राजस्थानी संस्कृति से जुड़े ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण जरिया हैं। प्रवास में रहने के बावजूद अपनी मातृभूमि की परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहना हमारी जिम्मेदारी है।

माहेश्वरी महिला मंडल की अध्यक्ष सुजाता सोनी एवं सचिव उषा हेडा ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं सत्कार किया। कार्यक्रम का मंच संचालन निधि लाखोटिया ने अपनी मधुर वाणी और प्रभावी अंदाज में किया, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह बना रहा।

कार्यक्रम में राजस्थान फाउंडेशन के मीडिया प्रभारी महेश पुंगलिया, बसंत खेतान सहित महिला मंडल की पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में समाज की मातृशक्ति उपस्थित रही। आयोजन को सफल बनाने में महिला मंडल की कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के अंत में राजस्थान फाउंडेशन के सचिव संजय बोथरा ने सभी अतिथियों, मातृशक्ति, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को सहेजने तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के लिए भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों का सिलसिला निरंतर जारी रखा जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान सूरत में राजस्थान की लोक संस्कृति, तीज की उमंग और पारंपरिक रंगों का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मिट्टी और संस्कृति से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

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