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सूरत मेट्रो में इंजीनियरिंग का ‘डायमंड कट’, 110 फीट नीचे देश का अनूठा स्टैक्ड स्टेशन

700 साल पुराने वृक्ष को बचाने बदला अलाइनमेंट, डिपो में 3 हजार से ज्यादा पेड़

सूरत। टेक्सटाइल और डायमंड सिटी के रूप में देश-दुनिया में पहचान बना चुका सूरत अब आधुनिक मेट्रो रेल के जरिए अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन की नई इबारत लिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में विकसित हो रही सूरत मेट्रो परियोजना में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग के साथ पर्यावरण और विरासत संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। परियोजना में देश में पहली बार कई अनूठी तकनीकों और डिजाइन का प्रयोग किया जा रहा है।

मेट्रो में दिखेगी हीरे की चमक

सूरत की पहचान डायमंड सिटी के तौर पर है। इसी पहचान को मेट्रो के इंटीरियर में भी उतारा गया है। मेट्रो ट्रेन की सीलिंग और एलिवेशन में डायमंड के अलग-अलग आकर्षक कट्स पर आधारित डिजाइन तैयार की गई है। दावा है कि इस तरह की थीमेटिक डिजाइन भारतीय मेट्रो में पहली बार देखने को मिलेगी।

110 फीट नीचे बन रहे स्टैक्ड स्टेशन

सूरत के घने इलाकों मस्कती अस्पताल और लाभेश्वर में देश के पहले ‘स्टैक्ड मेट्रो स्टेशन’ तैयार किए गए हैं। करीब 110 फीट की गहराई में दो मंजिला अंडरग्राउंड टनल स्ट्रक्चर बनाया गया है। इसमें अप और डाउन लाइन के प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के अगल-बगल न होकर ऊपर-नीचे स्थित होंगे। एक ही मेट्रो परियोजना में दो स्टैक्ड स्टेशन होना भी अपने आप में अनूठा है।

700 साल पुराने पेड़ के लिए बदला मेट्रो रूट

मेट्रो परियोजना में पर्यावरण और विरासत संरक्षण का भी उदाहरण देखने को मिलता है। अडाजण गांव में 700 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक ‘चोर आमली’ वृक्ष को बचाने के लिए मेट्रो का पूरा अलाइनमेंट बदल दिया गया। इसके अलावा छह अंडरग्राउंड स्टेशनों को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) के ग्रीन मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है।

डिपो में 3 हजार से ज्यादा पेड़

खजोद में करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में अत्याधुनिक ड्रीम सिटी डिपो तैयार किया गया है। यहां एक साथ 24 मेट्रो ट्रेनों को खड़ा करने की क्षमता वाला स्टेबलिंग यार्ड, मेंटेनेंस और वॉशिंग प्लांट, तकनीकी इकाइयां और प्रशासनिक ब्लॉक बनाए गए हैं। डिपो परिसर में 3 हजार से अधिक पेड़ लगाए गए हैं। सीवेज और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए पानी के पुन: उपयोग की व्यवस्था भी की गई है।

थर्ड रेल सिस्टम से मिलेगी बिजली

सूरत मेट्रो में 750 वोल्ट डीसी थर्ड रेल सिस्टम के जरिए ट्रेनों को बिजली की आपूर्ति होगी। इसमें बिजली के खंभों की जरूरत नहीं होगी। इससे तेज हवाओं और तूफान जैसी परिस्थितियों में भी मेट्रो संचालन को अधिक सुरक्षित और निर्बाध रखने में मदद मिलेगी।

मजूरागेट बनेगा पहला इंटरचेंज हब

कॉरिडोर-1 और कॉरिडोर-2 को जोड़ने वाला मजूरागेट स्टेशन सूरत का पहला इंटरचेंज हब बनेगा। वहीं सूरत रेलवे स्टेशन, सिटी बस और GSRTC डिपो को एक ही छत के नीचे जोड़ने वाला मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क शहर के सार्वजनिक परिवहन को नई गति देगा।

810 टन स्टील से बना विशाल गर्डर

सारोली और रघुकुल टेक्सटाइल मार्केट में 47 हजार से अधिक नट-बोल्ट और करीब 810 टन स्टील से 85 मीटर लंबा विशाल ओपन वेब गर्डर लॉन्च किया गया है। यह परियोजना के इंजीनियरिंग कौशल का एक और उदाहरण है।

सूरत मेट्रो परियोजना आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, विरासत के सम्मान और शहर की विशिष्ट पहचान के समन्वय के साथ सूरत को वैश्विक स्तर की स्मार्ट और ग्रीन सिटी के रूप में नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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