उदयपुर जिले के गोगुन्दा में एक भी कोविड पॉजिटीव नही

उदयपुर (कांतिलाल मांडोत) विगत कुछ दिनों से कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने से लोग राहत महसूस कर रहे है।तभी ब्लैक फंगस ने कहर मचाना  शुरू कर दिया है।चंद दिनों में भयावह रूप धारण कर लिया है।जबकि ब्लैक फंगस मरीज  का ऑपरेशन   भी सफलता पूर्वक किया गया है।ब्लैक फंगस को लेकर राजस्थान ही नही 14 राज्य सरकारों ने  ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने के लिए विवश होना पड़ा है।विभिन्न राज्यो में इस नई बीमारी की चपेट में आए नॉ हजार लोगो मे से 200 लोगो की मौत हो चुकी है।
अब तो ब्लैक,सफेद और यलो फंगस के मरीज भी मिल रहे है।अहमदाबाद में यलो फंगस की पुष्टि भी हुई है ।दुनिया मे ब्लैक फंगस की बीमारी में हर तीन व्यक्तियों में दो भारत के है।ब्लैक फंगस से निपटना सरकार की पहली प्राथमिकता है।अफसोस की बात यह है कि ब्लैक फंगस की बीमारी के लिए कई राज्यो में बड़ी मात्रा में इंजेक्शन उपलब्ध नही है।लिहाजा, देश मे टीकाकरण की रफ्तार धीमी है।कई राज्यो में टीकाकरण केंद्र बन्द करने पड़ रहे है।किसका मुख्य वैवसीन का अभाव है।उदयपुर सहित तेज हवाओं के कारण कई जगह अव्यवस्था देखी गई थी।
गोगुन्दा निवासी एक व्यक्ति  ने बटुआ लौटाया
उदयपुर जिले के गोगुन्दा  निवासी रोशनलाल प्रजापत को बस स्टैंड स्थित टर्मिनल के समीप एक बटुआ मिला।बटुआ खोल कर देखा तो उसमें कुछ रुपए थे।रुपए से भरे बटुए में 6600 रुपए नकद और एक आधार कार्ड मिला।रोशनलाल प्रजापत ने गोगुंदा के पूर्व उपसरपंच दयालाल चौधरी से भेंट की।बटुए में मिले नाम और पते के आधार पर मोरवल निवासी चेनाराम गमेती को उसका बटुआ लौटा दिया।
दयालाल चौधरी ने बताया कि दिव्यांग चेनाराम गमेती बैंक से रकम निकाल कर वापस घर लौट रहा था,उस दौरान बटुआ रस्ते में गिर गया।रोशनलाल प्रजापत ने ईमानदारी की मिशाल पेश की है।आज के परिपेक्ष्य में लोग मानवता को भूलते जा रहे है।आदमी की नीयत सौ रुपए पर भी बिगड़ जाती है।लेकिन एक सामान्य व्यक्ति ने ईमानदारी का परिचय देकर प्रजापत समाज का नाम रोशन किया है।ईमानदार व्यक्तियों की वजह से  ईमानदारी
जिंदा है।

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