सिडबी – सीआरआईएफ की रिपोर्ट से पता चलता है कि यथा दिसंबर 2020 तक भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग ने 1.62 लाख करोड़ रुपये का ऋण लिया

 

सूरत, जून, 2021:सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के संवर्द्धन, वित्तपोषण और विकास में संलग्न प्रमुख वित्तीय संस्थान, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और सीआरआईएफ़ हाई मार्क, एक प्रमुख भारतीय क्रेडिट ब्यूरो, ने आज अपनी रिपोर्ट ‘उद्योग स्पॉटलाइट’ का तीसरा संस्करण लॉन्च किया जो ‘भारतीय कपड़ा और परिधान’ उद्योग का विश्लेषण करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, यथा दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र द्वारा प्राप्त ऋण की कुल राशि `1.62 लाख करोड़ रही, जिसमें लगभग 20% की वर्षानुवर्ष गिरावट देखी गई। मार्च 2020 में कोविड-19 के लॉकडाउन के तत्काल बाद में विनिर्माण गतिविधियों के निलंबन के कारण ऐसा हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यथा दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र में सक्रिय ऋणों (मात्रा की दृष्टि से) की संख्या 4.26 लाख रही।
उद्योग ने पिछले 2 वर्षों में अनअर्जक आस्तियों (90+ दिनों से बकाया ऋण मूल्य का अनुपात) में तिमाही गिरावट देखी है, जो सितंबर 2018 में 29.59% से सितंबर 2020 में 15.98% हो गई। दिसंबर 2020 में इन अनअर्जक आस्तियों में 0.94% की वृद्धि हुई जो दिसंबर 2019 में अनअर्जक आस्तियों की तुलना में लगभग 8% कम है।
मात्रा के हिसाब से इस क्षेत्र को दिए गए कुल ऋण का 95% हिस्सा सूक्ष्म, लघु और मध्यम खंड के उधारकर्ताओं के पास केन्द्रित रहने के साथ इस उद्योग क्षेत्र में यथा दिसंबर 2020 तक लगभग 5 लाख उधारकर्ता मौजूदहैं।
राज्य के स्तर पर, इस क्षेत्र की ऋणबही के 25% के ऋण संविभाग का सबसे बड़ा हिस्सामहाराष्ट्र राज्य के पास है।
रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि कपड़ा और परिधान निर्माण में समृद्ध 13 शीर्ष क्षेत्रों में यथा दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र के कुल ऋण संविभाग का 80% हिस्सा रहा।लगभग सभी राज्यों में ऐसे जिले हैं जिनमें कपड़ा और परिधान निर्माण करने वाली कई ऋण सक्रिय इकाइयाँ हैं। मुंबई और सूरत जैसे कुछ जिलों का ऋण संविभाग यथा दिसंबर 2020 तक 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का रहा है।
सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री सिवसुब्रमणियन रमणने कहा, “भारत में कपड़ा और परिधान उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे पुराने और सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है और देश की रोजगार कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह क्षेत्र, निर्यात में पांचवां सबसे बड़ा है, जो देश की निर्यात आय का 12% और सकल घरेलू उत्पाद में 2% का योगदान करता है। भारत, वस्त्रों के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है और इसके पास संपूर्ण विनिर्माण मूल्य श्रृंखला है। केंद्रीय बजट 2021-22 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने की सोच में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है और तदनुसार, वैश्विक स्तर पर भारत की कपड़ा प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए, एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान पार्क की एकीकृत योजना (एमआईटीआरए) की घोषणा भी की गई थी, जो घरेलू बाजार में तीव्र सुधार को परिदर्शित करने के लिए प्लग एंड प्ले सुविधाओं के साथ विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करेगी।
सीआरआईएफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यापालक अधिकारीश्री नवीन चंदानी ने कहा, “वैश्विक महामारी के बावजूद, कपड़ा और परिधान निर्माण में समृद्ध शीर्ष तेरह क्षेत्रों में यथा दिसंबर 2020 तक ऋण संविभाग का 75% हिस्सा प्रयुक्त हो रहा था। भारत में, परिधान और कपड़ा क्षेत्र में प्रत्येक राज्य का अपना अनूठा योगदान है। भारत सरकार ने मई 2020 में आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जो देशभर में बुनकरों और कारीगरों सहित बड़ी संख्या में छोटे पैमाने की संस्थाओं को लाभान्वित करने के लिए लक्षित है। सही नीतिगत हस्तक्षेप, कच्चे माल की प्रचुर उपलब्धता और उचित पहुँच के साथ-साथउपलब्ध श्रम आधिक्य, इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ावा दे सकता है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *