
प्रशासनिक लापरवाही से डूबा सूरत का कारोबार, कपड़ा उद्योग को करोड़ों की चोट
दो दिन की बारिश ने खोली व्यवस्थागत विफलता की पोल; बाजार, गोदाम और औद्योगिक इकाइयों में जलभराव से व्यापार ठप
सूरत। लगातार दो दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने सूरत शहर की व्यवस्थागत तैयारियों की पोल खोल दी। शहर के अधिकांश हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे कपड़ा उद्योग और व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। उद्योगपतियों और व्यापारियों का कहना है कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर व्यवस्थाओं से उत्पन्न मानव निर्मित आपदा है।
रिंग रोड स्थित अशोक टावर, अभिषेक मार्केट, महावीर मार्केट, साई दर्शन मार्केट, सिल्क प्लाजा, अनमोल मार्केट, साई कृपा मार्केट, रघुकुल मार्केट और मिलेनियम मार्केट-1 सहित कई प्रमुख कपड़ा बाजारों के बेसमेंट और भूतल में घुटनों तक पानी भर गया। त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों ने करोड़ों रुपए का नया स्टॉक तैयार किया था, जो जलभराव से खराब हो गया। कच्चा और तैयार माल, पैकिंग सामग्री तथा अन्य आवश्यक सामान भी पानी में भीगकर नष्ट हो गया।
सारोली क्षेत्र में जलभराव के कारण श्रमिक काम पर नहीं पहुंच सके, जिससे करोड़ों रुपए का व्यापार प्रभावित हुआ। वहीं, स्थानीय लॉजिस्टिक्स पार्कों में रखा माल भी पानी में डूबने से भारी आर्थिक नुकसान होने की सूचना है।

शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थित अंजनी औद्योगिक क्षेत्र सहित कई औद्योगिक इलाकों में जलभराव के कारण बुनाई इकाइयों का उत्पादन प्रभावित हुआ। अंजना फार्म, कतरगाम, पुराने जीआईडीसी और उधना की औद्योगिक इकाइयों में धागा, सूत के गोदाम, कार्यालय और दुकानें जलमग्न हो गईं। सचिन क्षेत्र में जलभराव के चलते रंगाई और छपाई मिलों का संचालन भी बंद करना पड़ा।
व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि मानसून पूर्व नालों और खाड़ियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने तथा जल निकासी व्यवस्था कमजोर होने से हर वर्ष ऐसी स्थिति बनती है। उनका कहना है कि प्रशासन की उदासीनता और अव्यवस्थित योजना के कारण सूरत की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उद्योगपतियों ने प्रशासन से प्रभावित व्यापारियों के नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और स्थायी उपाय करने की मांग की है।



