
सूरत। भारी बारिश के कारण सूरत शहर और जिले में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल गुरुवार को सूरत पहुंचे। उन्होंने अलथाण स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, वित्त एवं सूरत जिला प्रभारी मंत्री कनुभाई देसाई तथा राज्य स्वास्थ्य मंत्री प्रफुलभाई पानशेरिया भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों, सफाई अभियान, रोग नियंत्रण उपायों और प्रभावित परिवारों को कैश डोल तथा घरेलू सहायता राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूरत में खाड़ी बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए राज्य सरकार खाड़ी विकास परियोजना पर 500 करोड़ रुपये खर्च करेगी। उन्होंने अधिकारियों को भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करते हुए नागरिकों की सुरक्षा और भविष्य की तैयारियों पर विशेष ध्यान देना होगा।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि बाढ़ की स्थिति से जुड़े विकास कार्यों में यदि कहीं गुणवत्ता में कमी या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मनपा आयुक्त एम. नागराजन ने बताया कि इस सप्ताह ही सूरत में पूरे मानसून का लगभग 30 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई। अब तक 3,600 लोगों का रेस्क्यू किया गया है, जबकि 4,100 प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। शहर में एनडीआरएफ की दो और एसडीआरएफ की पांच टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
जिला कलेक्टर तेजस परमार ने बताया कि पलसाणा और कामरेज में सर्वाधिक वर्षा हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का सर्वे तेजी से किया जा रहा है तथा बुधवार से ही कैश डोल और घरेलू सहायता राशि का वितरण शुरू कर दिया गया है। सूरत दौरे के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल नवसारी पहुंचे, जहां उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और विधायकों के साथ बैठक कर भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की तथा राहत एवं बचाव कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।



