
नहरों में अर्धविसर्जित मिलीं 500 से अधिक दशामाता की प्रतिमाएं, समुद्र में कराया पुनर्विसर्जन
श्री माधव गौशाला के गौसेवकों ने चलाया सेवा अभियान; श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
सूरत। सांस्कृतिक रक्षा समिति के संचालन में चल रही श्री माधव गौशाला एवं एनिमल हॉस्टल के गौसेवकों ने सूरत शहर की विभिन्न नहरों से अर्धविसर्जित और लावारिस हालत में मिली 500 से अधिक दशामाता की प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक बाहर निकालकर मगदल्ला समुद्र तट पर विधिवत पुनर्विसर्जित किया।
सांस्कृतिक रक्षा समिति के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान के दौरान मधुरम सर्कल नहर, खरवासा नहर सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिमाएं एकत्र की गईं। कम पानी, कीचड़ और गंदगी वाले स्थानों पर विसर्जन के कारण खासकर पीओपी की प्रतिमाएं पूरी तरह विसर्जित नहीं हो पातीं और लंबे समय तक नहरों में पड़ी रहती हैं।
समिति के अध्यक्ष आशीष सूर्यवंशी को इसकी जानकारी मिलने के बाद गौसेवकों ने तत्काल अभियान शुरू किया। प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक बाहर निकालकर धार्मिक भावना के अनुरूप समुद्र में पुनर्विसर्जित किया गया।
सूर्यवंशी ने कहा कि देवी-देवताओं की प्रतिमाएं केवल मिट्टी या पीओपी से बनी मूर्तियां नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का प्रतीक हैं। इसलिए विसर्जन के बाद भी उनके प्रति सम्मान बनाए रखना हमारी धार्मिक और नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक रक्षा समिति पिछले 9 वर्षों से गणेशजी और दशामाता की अर्धविसर्जित प्रतिमाओं को एकत्र कर उचित स्थान पर पुनर्विसर्जन की सेवा कर रही है।
भक्तों से अपील
समिति ने लोगों से अपील की कि जिस श्रद्धा से माता की स्थापना की जाती है, उसी श्रद्धा से उनका विसर्जन भी किया जाए। प्रतिमाओं को नहर, कीचड़ या गंदे पानी में न छोड़ें और प्रशासन द्वारा निर्धारित उचित स्थान एवं पद्धति से ही विसर्जन करें। इससे धार्मिक भावनाओं के साथ पर्यावरण की भी रक्षा होगी।



