
सात समंदर पार भाइयों तक पहुंची बहनों की राखी, डाक विभाग बना स्नेह का सेतु
सूरत से 100 से अधिक देशों में भेजे गए 10,600 से ज्यादा राखी कवर और पार्सल
सूरत। रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रिश्ते का पर्व है। भले ही रोजगार और शिक्षा के कारण भाई-बहन एक-दूसरे से हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन भारतीय डाक विभाग राखी के माध्यम से उनके स्नेह को सीमा पार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सूरत डाक विभाग की ओर से पिछले 25 दिनों में 100 से अधिक देशों में 10,600 से ज्यादा विशेष राखी कवर और पार्सल रियल टाइम ट्रैकिंग सुविधा के साथ भेजे गए हैं। वहीं, गुजरात से डाक के माध्यम से 76 हजार से अधिक राखियां विदेश भेजी गई हैं। इनमें अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन प्रमुख देश हैं।

वाटरप्रूफ कवर और ट्रैकिंग की सुविधा
राखियों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए डाक विभाग ने विशेष डिजाइन वाले वाटरप्रूफ राखी कवर उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा घर बैठे व्हाट्सऐप पिकअप, सेल्फ बुकिंग और ऑनलाइन स्पीड पोस्ट ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इंटरनेशनल ट्रैक्ड पैकेट सर्विस और स्पीड पोस्ट के जरिए देश-विदेश में राखियां भेजी जा रही हैं।

एसवीआर कॉलेज पोस्ट ऑफिस के पोस्टल असिस्टेंट स्नेहल पटेल ने बताया कि विदेश में रहने वाले भाइयों तक राखी पहुंचाने के लिए भारतीय डाक आज भी बहनों की पहली पसंद बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कई बहनें अपने भाइयों को वर्षों से नहीं देख पातीं। ऐसे में राखी के साथ उनका प्रेम, आशीर्वाद और भावनाएं भी पहुंचती हैं।
उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन तक राखियां समय पर पहुंचाने के लिए डाक विभाग रविवार और त्योहार के दिन भी कार्यरत रहता है। विभाग केवल राखी का कवर नहीं, बल्कि बहनों की ममता और शुभकामनाएं पहुंचाने का काम कर रहा है।
14 साल से डाक से भेज रही राखी
सूरत में पिछले 14 वर्षों से रह रहीं शिवांगी सिंह के लिए भारतीय डाक विभाग भाई तक राखी पहुंचाने का भरोसेमंद माध्यम बना हुआ है। उन्होंने बताया कि नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण हर साल भाई के पास जाकर राखी बांधना संभव नहीं होता। इसलिए वे पिछले 14 वर्षों से डाक के जरिए राखी भेज रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भेजी गई राखी महज तीन दिन में भाई तक पहुंच गई। उन्होंने डाक विभाग की तेज और सुरक्षित सेवा की सराहना की।
रक्षाबंधन पर भारतीय डाक विभाग की यह पहल समुद्रों और भौगोलिक सीमाओं की दूरी को कम कर भाई-बहन के रिश्ते और भारतीय संस्कृति की भावनाओं को जोड़ने वाले जीवंत सेतु का काम कर रही है।



