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सूरत में नमो लक्ष्मी और नमो सरस्वती योजना के तहत 106 करोड़ की सहायता

योजना से छात्राओं की शिक्षा और विज्ञान के विद्यार्थियों को मिल रहा आर्थिक संबल

सूरत। विश्व विद्यार्थी दिवस (15 अक्टूबर) के अवसर पर सूरत जिले में राज्य सरकार की नमो लक्ष्मी योजना और नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन दोनों योजनाओं के तहत वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में अब तक कुल 8,79,309 लाभार्थियों को 106.06 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। इससे विद्यार्थियों को आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद पढ़ाई जारी रखने और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिल रहा है

नमो लक्ष्मी योजना से छात्राओं को सहारा

राज्य सरकार की नमो लक्ष्मी योजना का उद्देश्य छात्राओं को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इससे आर्थिक परेशानियों के कारण छात्राओं की पढ़ाई बीच में छूटने की आशंका कम करने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।

सूरत जिले में इस योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 5,30,263 लाभार्थियों को 34.72 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं, वर्ष 2026-27 में अब तक 2,10,187 लाभार्थियों को 54.30 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है।

नमो सरस्वती योजना से विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा

विज्ञान विषय में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने और उच्च शिक्षा की संभावनाओं को साकार करने के लिए आर्थिक सहयोग देना है।

इस योजना के तहत सूरत जिले में वर्ष 2025-26 में 94,754 विद्यार्थियों को 9.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वर्ष 2026-27 में अब तक 44,105 विद्यार्थियों को 7.57 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है।

शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर

दोनों योजनाओं के तहत वर्ष 2025-26 में कुल 6,25,017 लाभार्थियों को 44.19 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 में अब तक 2,54,292 लाभार्थियों को 61.87 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।

विश्व विद्यार्थी दिवस विद्यार्थियों की शिक्षा, शोध, नवाचार और सर्वांगीण विकास के महत्व को रेखांकित करता है। आर्थिक सहायता की ऐसी पहल विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को राहत देने के साथ पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने में सहायक है। शिक्षित, कुशल और आत्मनिर्भर युवा पीढ़ी के निर्माण के जरिए विकसित सूरत, विकसित गुजरात और विकसित भारत के लक्ष्य को भी मजबूती मिल सकती है।

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