
सूरत में दशहरे पर होगा 80 फीट ऊंचे रावण का दहन
आगरा के 15 मुस्लिम कारीगर दिन-रात जुटे तैयारी में, रावण-कुंभकर्ण-मेघनाद के पुतलों में दिखेगा राजशाही अंदाज; आंखों से निकलेंगी लपटें, नाभि से होगी अमृतवर्षा
सूरत। शहर में दशहरा पर्व पर इस बार 80 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट की ओर से वेसू स्थित वीआईपी रोड के एसएमसी मैदान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा से आए करीब 15 कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। खास बात यह है कि हिंदुओं के प्रमुख पर्व दशहरे के लिए रावण के पुतले का निर्माण मुस्लिम कारीगर कर रहे हैं। यह सूरत में सांप्रदायिक सौहार्द और कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहा है।
इंसानी शरीर जैसी बनावट, राजशाही पोशाक में दिखेगा रावण
आगरा से अपनी टीम के साथ आए असगर अली ने बताया कि उनकी चौथी पीढ़ी रावण के पुतले बनाने का काम कर रही है। हालांकि, गुजरात में पहली बार उन्हें अपनी कला दिखाने का अवसर मिला है। इस बार रावण का पुतला 80 फीट ऊंचा, जबकि कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले 60-60 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं। लंका का आकार भी पहले से बड़ा रखा गया है।
असगर अली के मुताबिक, इस बार रावण को कार्टून जैसी आकृति देने के बजाय वास्तविक इंसानी शरीर जैसा रूप दिया जा रहा है। उसके कंधे, धड़ और चेहरे को विशेष डाई मशीनों की मदद से तैयार किया गया है। रावण को राजशाही पोशाक, काली मोजड़ी, धोती और युद्ध के मैदान में पहने जाने वाले सुरक्षा कवच से सजाया जाएगा।
रिमोट से घूमेगी छतरी, आंखों से निकलेंगी आग की लपटें
इस बार रावण के पुतले में कई विशेष तकनीकी आकर्षण भी होंगे। दहन के दौरान इलेक्ट्रिक रिमोट की मदद से उसके सिर पर लगी छतरी घूमेगी। उसकी आंखों से आग की लपटें, मुंह से अंगारे और कानों से धुआं निकलेगा। वहीं, नाभि से अमृतवर्षा जैसा विशेष दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा, पुतलों में विशेष आवाज वाले गोले लगाए जा रहे हैं, जिनकी गूंज दूर तक सुनाई देगी।
सिविल इंजीनियर हैं असगर अली, बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर
असगर अली ने बताया कि उनकी टीम पिछले महीने से पुतले बनाने में जुटी हुई है। उनका सपना गुजरात में अपनी कला का प्रदर्शन करना था, जो इस बार पूरा हो रहा है। उनकी कुल 60 सदस्यों की टीम देशभर में अलग-अलग स्थानों पर रावण के पुतले बनाने का काम करती है।
खास बात यह है कि असगर अली स्वयं सिविल इंजीनियर हैं और उनका बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। इसके बावजूद परिवार की कई पीढ़ियों से चली आ रही इस कला के प्रति उनका लगाव बरकरार है। दशहरे के अवसर पर तैयार होने वाला यह विशाल रावण न केवल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश भी देगा।



