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कैट ने प्रधानमंत्री मोदी से चुनावों में प्रत्याशी की शैक्षिंक योग्यता को अनिवार्य करने की माँग की

नई दिल्ली। चुनाव सुधारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए एक देश -एक चुनाव विज़न में एक नई कड़ी जोड़ते हुए कनफ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) ने आज प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजकर आग्रह किया कि देश में लोकतंत्र को बेहतर रूप से सक्षम बनाने की दृष्टि से अब समय आ गया है जब चुनावों में खड़े होने वाले प्रत्याशियों की कोई भी कम से कम शैक्षिक योग्यता को भी अनिवार्य बनाया जाये। इस मुद्दे पर कैट ने इसी प्रकार के पत्र देश के सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय दलों को भी भेजे है ।इस विषय पर कैट सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिन 31 अक्तूबर से देश भर के व्यापारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं अन्य संगठनों तथा देश के प्रबुद्ध वर्ग के बीच रायशुमारी का एक अभियान भी शुरू कर रहा है ।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष  बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री  प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि 1951 में जब संविधान बन रहा था तब देश में साक्षरता दर मात्र 18 प्रतिशत थी और उसी बात को ध्यान में रखते हुए संभवत: संविधान निर्माताओं ने शैक्षिक योग्यता को उस समय अनिवार्य नहीं किया था लेकिन संविधान के अनुच्छेद 84 ( सी) में यह प्रावधान किया है कि संसद द्वारा पारित किसी क़ानून के अंतर्गत चुनाव लड़ने की योग्यता में कोई भी अतिरिक्त योग्यता जोड़ी जा सकती है । इससे यह आभास होता है कि कहीं न कहीं संविधान निर्माताओं के ध्यान में शैक्षिक योग्यता का विषय भी रहा होगा ।

भरतिया एवं  खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी देश की भलाई के लिए अनेक नये प्रयोग और सुधार शुरू करने के लिए जाने जाते है एवं चुनाव सुधार उनकी प्राथमिकताओं में से एक है और उसी दृष्टि से कैट ने उनसे इस महत्वपूर्ण चुनाव सुधार करने का आग्रह किया है ।

प्रधानमंत्री श्री मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि आज देश में किसी भी सरकारी अथवा ग़ैर सरकारी नौकरी के लिए अनिवार्य रूप से शैक्षिक पात्रता रखी जाती है तो फिर जो लोग संसद, विधानसभा एवं स्थानीय निकायों में चुने जाते है और जिनके कंधों पर देश, राज्य अथवा शहर चलाने की जिम्मेदारी होती है, उन लोगों की शैक्षिक पात्रता का भी होना बेहद ज़रूरी है जिससे प्रशासन और अधिक सक्षम बन सके और देश के आम आदमी की आकांक्षाओं पर खरा उतरे ।

भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में टेक्नोलॉजी का देश भर में तेज़ी से विकास हुआ है, ऐसे में यदि प्रत्याशियों की शैक्षिक योग्यता को भी जोड़ा जाता है तो निश्चित रूप से देश की राजनीति और अधिक परिपक्व होगी।

भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा कि नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए कम से कम किसी क्षेत्र में डिग्री, डिप्लोमा या स्किल से संबंधित कोई विशेषता अनिवार्य होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि ये सकारात्मक परिवर्तन भारत जैसे देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भ्रष्टाचार, काला धन जिसमें काफ़ी कमी आई है और गरीबी जो देश के विकास को प्रभावित कर रहे हैं, उनसे सक्षम राजनीतिक व्यवस्था द्वारा प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है, जहां न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्णयों में और अधिक गुणवत्ता लाएगी तथा प्रशासन भी अधिक चुस्त दुरुस्त होगा ।

भरतिया एवं खंडेलवाल ने सुझाव दिया कि उस विषय पर प्रधानमंत्री एक उच्च स्तरीय कमैटी का गठन करें जिसमें सिविल सोसाइटी के प्रमुख लोगों के अतिरिक्त शिक्षा विद् , संविधान विशेषज्ञ एवं अन्य लोग शामिल हों या फिर पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक देश एक चुनाव पर गठित समिति को यह विषय सौंप देना चाहिए।

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