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सूरत के कपड़ा उद्योग को राहत देने की मांग, गिरिराज सिंह को सौंपा ज्ञापन

यार्न की कीमतों पर निगरानी, बिजली खर्च में राहत और आसान ऋण की मांग

सूरत। सूरत के लघु एवं मध्यम वस्त्र उद्योगों की समस्याओं को लेकर लघु उद्योग भारती, सूरत महानगर ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। संगठन ने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, बिजली खर्च, कार्यशील पूंजी की कमी और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

लघु उद्योग भारती, सूरत महानगर के अध्यक्ष रामावतार पारीक ने बताया कि सूरत देश का प्रमुख एमएमएफ (मानव निर्मित फाइबर), सिंथेटिक कपड़ा और पावरलूम उद्योग केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में लघु एवं मध्यम उद्यमी कार्यरत हैं, लेकिन बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

यार्न की कीमतों पर निगरानी की मांग

ज्ञापन में पॉलिएस्टर यार्न और अन्य कच्चे माल की कीमतों पर निगरानी रखने के लिए विशेष समिति गठित करने का सुझाव दिया गया। साथ ही बिजली खर्च में राहत, आसान शर्तों पर बैंक ऋण, कार्यशील पूंजी की उपलब्धता और मशीनरी आधुनिकीकरण के लिए सब्सिडी व ब्याज सहायता देने की मांग की गई। संगठन ने एमएसएमई के तहत पंजीकृत वस्त्र व्यापारियों को सीजीटीएमएसई सहित पात्र ऋण योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।

भुगतान में देरी से कारोबार प्रभावित

संगठन ने भुगतान संबंधी समस्या को गंभीर बताते हुए दावा किया कि प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की राशि खराब ऋण अथवा भुगतान में देरी के कारण अटकी रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए सूरत में विशेष आर्थिक पुलिस स्टेशन और विशेष पुलिस बल गठित करने की मांग की गई, ताकि अंतरराज्यीय आर्थिक अपराधों तथा व्यापारिक भुगतान विवादों पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

लघु उद्योग भारती ने केंद्र सरकार से सूरत के वस्त्र उद्योग की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध समाधान लागू करने का आग्रह किया, जिससे छोटे उद्यमियों को राहत मिले और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत हो सके।

 

 

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