अनचाहे के बीच खुद को संभाले रखो और मनचाहा करने की कोशिश करते रहें: सुधांशुजी महाराज

सूरत। घी गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा शुक्रवार 4 मई 2021 को सुधांशुजी महाराज के साथ एक सुखी जीवन की चुनौतियाँ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें सुधांशुजी महाराज ने जीवन में सुखी रहने के लिए अपनी सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, पारिवारिक सुख, सामाजिक प्रतिष्ठा और ईश्वर भक्ति का महत्वपूर्ण ज्ञान दिया।

सुधांशुजी महाराज ने कहा कि बिना कीमत चुकाए जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता। इसके लिए उपयुक्त और सक्षम बनना पड़ता है। जीने के साथ-साथ सही समय पर जागने और सीखने की इच्छा भी होनी चाहिए। जीवन में निरंतर आगे बढऩे की इच्छा होनी चाहिए। अपनी खुशी की जिम्मेदारी कभी भी दूसरे पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा जीवन में आपसे अधिक मूल्यवान कोई नहीं है। इसलिए भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे कभी न भागें। अगर आप चिंता मुक्त जीवन जीते हैं तो आप खुश रहेंगे और इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। जब आप सुरक्षित होंगे तभी आप परिवार के सदस्यों को सुरक्षित रख सकते हैं।

कोविड-19 के कारण मानव जीवन दो भागों में बँटा हुआ है। एक कोरोना से पहले की जिंदगी और दूसरे कोरोना के बाद जिंदगी। इसलिए कोरोना से बचने के लिए सभी सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। व्यक्ति को स्वयं के स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए व्यायाम, प्राणायाम और अच्छी नींद की जरूरत होती है। उन्होंने मन से निकली हुई बातों में खुद को रखने और जीवन में हमेशा खुश रहने के लिए मन के अनुसार चीजों को बनाने के लिए लगातार प्रयास करने की सलाह दी।

जीवन में कर्मयोगी बनकर जीवन जीएं। आज के युग में कंपनी या कारखाने में मालिक और कर्मचारियों के बीच विश्वास का रिश्ता होना चाहिए। व्यापार – व्यवसाय में कंपनी के नाम और गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों द्वारा प्रयास किए जाने चाहिए। सुखी जीवन के लिए पारिवारिक सुख भी आवश्यक है। परिवार को धन की बजाय कृतज्ञता से भरना चाहिए। एक शिक्षक न केवल बच्चों को ज्ञान प्रदान करेगा बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढऩे, प्यार करने और आगे बढऩे के लिए प्रेरित करेगा। परिवार सहित समाज के लिए जीना चाहिए। समाज की मदद करने वाले व्यक्ति का समाज व्यक्ति के जीवित न रहने पर भी सम्मान के साथ उसका नाम लेता है।

जीवन में समस्या रहने की है। तो अगर आप भगवान में विश्वास करते हैं, तो वह आपको आगे ले जाएगा। जीवन में जब भी निराश हो जाएं तो एकांत में जाकर अपने आप से बात करें। जो समस्या उत्पन्न हुई है उसके बारे में सोचें और उसकी जड़ को खोजने का प्रयास करें। किसी समस्या को हल करने के लिए कभी भी सभी की सलाह न लें। उस विशेषज्ञ की सलाह लेकर समस्या से निकलने का प्रयास करें। अगर आप भगवान से इस समस्या से निजात पाने की प्रार्थना करते हैं, तो आपको समस्या से निकलने का रास्ता मिल जाएगा।

उन्होंने कहा कि सत्य स्वाभाविक है और शरीर भी असत्य को स्वीकार नहीं करता। इसलिए प्रिय वचन को जीवन में सत्य के साथ बोलो। सत्य में ही धर्म, परमात्मा और शक्ति समाहित है। इसलिए प्रेम के साथ-साथ सत्य भी हितैषी होना चाहिए। मृत्यु के भय के बारे में उन्होंने कहा कि साधुओं को भी मृत्यु का भय होता है। कायर दिन में हजार बार मरता है और वीर एक बार मरता है लेकिन वह हमेशा के लिए अमर हो जाता है। जिंदगी आएगी और जाएगी लेकिन जिंदगी को समझना जरूरी है।
चैंबर के मानद मंत्री निखिल मद्रासी ने पूरे वेबिनार का संचालन किया।

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