अक्षय तृतीया के दिन पू.अनुयोगाचार्य श्री लब्धिचंद्रसागरजी का वर्षीतप पारणा होगा

पूरे भारत से वर्षीतप के तपस्वियों का अनुमोदन कार्यक्रम यूट्यूब पर प्रसारित किया जाएगा

सूरत। अखात्रीज का अर्थ है अक्षय तृतीया, अक्षय तृतीया का महत्व शास्त्रों में बताया गया है। जैनों में अक्षय तृतीया का भी विशेष महत्व है। पहले तीर्थंकर आदिश्वर भगवान ने 400 दिन का वर्षीतप किया था। जिसका पारणा गन्ने के रस के जरिए उनके भतीजे श्रेयांसकुमार ने किया था। तब से जैनों में इसका विशेष महत्व रहा है। हर साल हजारों जैन श्रावक-श्राविका प्रभु ने किए वर्षी तप आराधना 400 दिनों के लिए करते हैं। जिसमें एक दिन उपवास और बियासना करना होता है। इसका पारणा तप की पूर्णता 400 दिन के बाद अखात्रिज के दिन करनी होती है।

इस साल सूरत में भी लगभग 700 आराधना कर रहे है। उनका पारणा भी अखात्रीज के दिन होगा। विशेष रूप से कोरोना के कठिन दौर में सागर समुदाय के अनुयोगाचार्य श्री लब्धिचंद्रसागरजी म.सा. ने भी 400 दिनों की वर्षीतप की लंबी तपस्या की है। उनका पारणा का कार्यक्रमवर्तमान परिस्थिति कोविड की होने पर शंखेश्वरपुरम चैनल पर लाइव प्रसारित किया जाएगा। पूज्यश्री द्वारा पालिताणा समीप शंखेश्वरपुरम तीर्थ – जैन साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। पूज्यश्री के पारणा का शंखेश्वरपुरम यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया जाएगा।

कार्यक्रम के कन्वीनर सुरेश डी. शाह ने आगे कहा कि पूज्यश्री के पारणा प्रसंग को लेकर पूरे भारत में जिन्होंने भी वर्षीतप की आराधना की है वह सभी तपस्वियों और पूज्यश्री के तप की अनुमोदना के संगीत क ार्यक्रम 14 मई की रात 8 से 10 बजे तक पूरे भारत के विभिन्न संगीतकारों जैसे नीलेशभाई राणावत, अंकुर शाह आदि द्वारा किया जाएगा। सभी तपस्वियों के दर्शन का लाभ यूट्यूब पर मिलेगा। पूज्यश्री का पारणा ता. १५ मई यानि अखातीज के सुबह ९ से १२ के बीच होगा। इस अवसर प्रवचनकार जैसे कि पू.सागरचंद्रसागरसूरी, विमलसागरसुरी, अक्षयचंद्रसागरसूरी, नयपदमसागरजी, विनम्रसागरजी के साथ-साथ निपुणसागरजी म.सा. प्रवचन देंगे।

अनुयोगाचार्य लब्धिचंद्रसागरजी म.सा.आशीर्वाद देंगे और उनके पारणा के कार्यक्रम को लाइव देखा जाएगा। साथ ही अतुलभाई शाह, कनुभाई दोशी, श्रेणिकभाई विदानी जैसे कई वक्ता इस अवसर को शब्दों से अलंकृत करेंगे। सभी कार्यक्रमों का संचालन सुरेश डी.शाह करेंगे और संगीत अंकुर शाह द्वारा परोसा जाएगा। वर्तमान की ऐसी कठिन परिस्थिति में भी पूज्यश्री के साथ-साथ इतने सारे आराधकों ने वर्षीतप की आराधना की है। आइए हम उनके कार्यक्रम को देखते हुए अनुमोदन करें और मानवता का विशेष कार्य करें।

 

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