एक सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर का बेटा कड़ी मेहनत से बना भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट ऑफिसर

मंजिल उन्हें मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है।

किसी शायर की यह लाइनें बहुत लोगों ने पढ़ी और सुनी होगी, लेकिन सूरत के लिंबायत डिंडोली में रहने वाले स्वप्निल गुलाले इसे खूब ठीक से समझा है और साबित कर दिया है कि हौसले के दम पर आसमां भी हासिल हो सकता है। डिंडोली जैसे श्रमिक बाहुल्य क्षेत्र में रहने वाल एक सामान्य परिवार के इस युवक ने अपनी मेहनत से ऐसी कामयाबी हासिल की कि सभी को उस पर गर्व है। स्वप्निल ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए आज लेफ्टिनेंट ऑफिसर के तौर पर सेना में भर्ती हो गए।

स्वप्निल के पिता सुरेश नारायण गुलाले एक सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर हैं और डिंडोली के नवागाम में खोडलकृपा में अपने परिवार के साथ रहते हैं। मूल तापी जिला के निझर निवासी है। इस आर्थिक रूप से मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे स्वप्निल का लक्ष्य सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना था। हालांकि परिवार की सामान्य स्थिति के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। अपनी पढ़ाई के अलावा, उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक रूप से चलाने के लिए काम किया। सुबह कॉलेज के बाद वह शाम को बच्चों के लिए ट्यूशन भी लेता था ताकि उसे कुछ आर्थिक मदद मिल सके।

स्वप्निल ने प्राथमिक शिक्षा डिंडोली मातृभूमि स्कूल में ली। सेना में शामिल होना पहले से ही एक लक्ष्य था इसलिए कॉलेज में पढ़ते हुए एनसीसी में प्रवेश लिया। आबू, सापुतारा और रायगढ़ में पर्वतारोहण किया। आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका स्वप्निल और उनके परिवार को इंतजार था। परीक्षा पास करने के बाद स्वप्निल का सेना में चयन हो गया और 11 महीने तक चेन्नई में अधिकारी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब उनकी पहली पोस्टिंग राजस्थान के जैसलमेर में लेफ्टिनेंट अधिकारी के रूप में है। स्वप्निल रविवार को नियुक्ति के बाद जब सूरत पहुंचे तो उनके परिवार के सदस्यों और दोस्तों ने सूरत हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत और सम्मान किया।

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