
सूरत। पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में सूरत महानगरपालिका (एसएमसी) ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उत्कृष्टता साबित की है। भारत सरकार के अमृत 2.0 मिशन के अंतर्गत संचालित ‘जल ही अमृत’ अभियान के तीसरे चरण के मूल्यांकन में सूरत के 17 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने सूरत महानगरपालिका को 27.23 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मंजूर की है। इस उपलब्धि के साथ सूरत को अब तक कुल 100.55 करोड़ रुपये की ग्रांट प्राप्त हो चुकी है।
पहले दो चरणों में भी रहा शानदार प्रदर्शन
‘जल ही अमृत’ अभियान के पहले और दूसरे चरण में सूरत के 20 में से 19 एसटीपी को सर्वोच्च 5-स्टार क्लीन वॉटर क्रेडिट रेटिंग और एक एसटीपी को 4-स्टार रेटिंग मिली थी। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर गुजरात को आवंटित 114.63 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि में से 73.33 करोड़ रुपये सूरत महानगरपालिका को प्राप्त हुए थे।
तीसरे चरण में भी कायम रखा दबदबा
हाल ही में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा किए गए ऑन-ग्राउंड निरीक्षण और मूल्यांकन में सूरत के 17 एसटीपी ने जल शोधन, पर्यावरणीय मानकों और संचालन गुणवत्ता के सभी मापदंडों पर खरा उतरते हुए दूसरी किस्त की प्रोत्साहन राशि के लिए पात्रता हासिल की। गुजरात के लिए स्वीकृत 32.53 करोड़ रुपये की राशि में से 27.23 करोड़ रुपये सूरत को मिले हैं, जो राज्य की कुल प्रोत्साहन राशि का 83 प्रतिशत से अधिक है।
प्रतिदिन 1320 एमएलडी गंदे पानी का शोधन
सूरत महानगरपालिका अपने 20 आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 1320 एमएलडी गंदे पानी का शोधन कर रही है। टर्शियरी ट्रीटमेंट के बाद इस पानी का उपयोग पांडेसरा और सचिन जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इससे पेयजल की बचत होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
आईएफएएस तकनीक बनी मिसाल
सूरत के अंजना स्थित एसटीपी में ‘इंटीग्रेटेड फिक्स्ड-फिल्म एक्टिवेटेड स्लज (आईएफएएस)’ तकनीक का सफल उपयोग किया गया है। यह तकनीक कम लागत और सीमित स्थान में प्रभावी जल शोधन की क्षमता रखती है। केंद्रीय संस्था सीपीएचईईओ ने इस मॉडल की सराहना की है और इसे देश के अन्य शहरों के लिए मार्गदर्शक मॉडल के रूप में अपनाया जा रहा है।
ग्रीन एनर्जी और आधुनिकीकरण पर रहेगा जोर
प्राप्त 100.55 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का उपयोग शहर के सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने में किया जाएगा। इसके तहत पुराने एसटीपी का आधुनिकीकरण, नई मशीनरी एवं ऑटोमेशन सिस्टम की स्थापना तथा सोलर और विंड पावर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्लांट परिसरों में विकसित करने की योजना है। इससे बिजली खर्च और कार्बन उत्सर्जन दोनों में कमी आएगी।
देश के लिए बना रोल मॉडल
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में जहां सीवेज प्रबंधन अधिकांश शहरों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है, वहीं सूरत ने जल पुनर्चक्रण और आधुनिक सीवेज प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर देश के सामने एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया है। सूरत की यह उपलब्धि अन्य शहरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।



