
राखी के धागों में बंधा पाँच पीढ़ियों का प्रेम
20-22 वर्षों से चली आ रही मूंदड़ा परिवार की अनूठी परंपरा, 100 से अधिक सदस्य एक साथ मनाते हैं रक्षाबंधन
सूरत। रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और पारिवारिक एकता को संजोने का अवसर है। इसी भावना को पिछले 20-22 वर्षों से अधिक समय से जीवंत रखे हुए है मूंदड़ा परिवार की बहन बेटियां का अनूठा रक्षाबंधन समारोह, जिसमें हर वर्ष परिवार की पाँच पीढ़ियाँ एक साथ एकत्रित होती हैं।
इस विशेष आयोजन में परिवार के करीब 100 सदस्य से ज्यादा एक साथ शामिल होते हैं। जब पाँच पीढ़ियाँ एक ही स्थान पर एक साथ दिखाई देती हैं, तो यह दृश्य अपने आप में पारिवारिक प्रेम, संस्कार और एकता की सुंदर मिसाल बन जाता है।
इस आयोजन की सबसे खास परंपरा परिवार की सभी बहनों— सुशीला बांगड़, संगीता झंवर, ममता राठी, तृप्ति झंवर, जयश्री काबरा एवं अर्चना न्याती — द्वारा सभी भाइयों को राखी बांधने की है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और आत्मीयता के साथ निभाई जा रही है।
रक्षाबंधन का यह अवसर अब परिवार के लिए महज एक धार्मिक पर्व न रहकर एक वार्षिक पारिवारिक उत्सव का रूप ले चुका है। राखी बांधने के साथ-साथ परिवारजन आपस में मिलते हैं, पुरानी यादें ताजा करते हैं, नई पीढ़ी को परिवार की परंपराओं से जोड़ते हैं और साथ मिलकर खुशियों के पल साझा करते हैं।
आज के बदलते दौर में, जब परिवार छोटे होते जा रहे हैं और रिश्तों के लिए समय निकालना कठिन होता जा रहा है, ऐसे में पाँच पीढ़ियों का एक साथ आना और दो दशकों से अधिक समय से इस परंपरा को निरंतर निभाना निश्चित रूप से अनुकरणीय है।
मूंदड़ा- बांगड़ परिवार व सभी बहनों का यह आयोजन इस बात का सुंदर उदाहरण है कि रिश्तों को केवल निभाया नहीं जाता, उन्हें समय देकर, साथ आकर और परंपराओं के माध्यम से अगली पीढ़ी तक पहुँचाया जाता है। यही इस रक्षाबंधन समारोह की सबसे बड़ी खूबसूरती और इसकी वास्तविक विरासत है।



