हिंदी सिनेमा के ट्रेजडी किंग दिलीपकुमार को नही भूल पाएगा  जमाना

कांतिलाल मांडोत
हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार का आज बुधवार को प्रातःकाल निधन हो गया। वे कई दिनों से बीमार थे। आज 98 साल की उम्र में मुंबई की हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली। 11 दिसम्बर 1922 में पेशावर में जन्मे दिलीपकुमार का बचपन का नाम यूसुफ खान था। हरफनमौला दिग्गज अभिनेता ने अपने करियर की शुरुआत 1944 में आई ज्वारभाटा फ़िल्म से की थी। उनकी पहली हिट फिल्म जुगनू 1947 में रिलीज हुई है। इस फ़िल्म से दिलीप कुमार को बॉलीवुड में हिट  फिल्मों के स्टार में लाकर खड़ा कर दिया। दरअसल,अंदाज फ़िल्म 1949 में रिलीज हुई,जो ब्लोकबूस्टर  साबित हुई। हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभीनेता दिलीपकुमार को अपने दौर का बेहतरीन अभिनेता माना जाता था। लिहाजा,दिलीपकुमार ने अनेक ब्लोकबूस्टर, सुपरहिटऔर हिट फिल्में दी है। जबकि 1982 में 10 जनवरी को रिलीज हुई शक्ति फ़िल्म  को एवरेज की श्रेणी में प्रस्थापित किया गया। उसी दौर में  1972में आई दास्तान फ़िल्म फ्लॉप साबित हुई।
1974 में 26 जुलाई को रिलीज हुई सगीना भी फ्लॉप हुई थी।उसके बाद 1967 का वर्ष राम श्याम फ़िल्म से दिलीपकुमार स्थापित हो गए। भूमिकाओं में मशहूर होने के कारण उनको ट्रेजडी किंग से जाना जाता था। हर तरह के अभिनय से दर्शकों का मन जितने वाले कलाकार ने अपने करोडो फेन को रुलाकर चले गए। हजारो लोगो को रुलाने वाले दिलीपकुमार के दुनिया मे करोडो फेंन है।नया दौर,राम और श्याम,आन,अंदाज,मधुमती,दाग, विधाता,कर्मा और मुग़ले -ए आजम जैसी ब्लोकबूस्टर और सुपरहिट और हिट फिल्म देने वाले दिग्गज कलाकार की कमी महसूस की जाएगी। बॉलीवुड को रुलाकर अलविदा कर गए महान कलाकार ने अनेक सुपरहिट गाने आज भी लोग सुनते है और राह चलते गुनगुनाते है। उनके गाने जहाँ भी ,जिस जगह भी लोगो के कानो में गानों के बोल गूंजते है,वो वहा खड़े होकर गाना सुनते है। उड़े जब जब जुल्फे तेरी,कुंवारियों के दिल मचले, दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा,सुहाना सफर और ये मौसम हसी, मांग के साथ तुमारा जैसे सुपर डुपर हिट गाने दुनिया की पहचान बन गई है।
दिलीपकुमार को फिल्मों में यादगार अभिनय के लिए दादा साहब फाल्के अवार्ड से नवाजा गया।1958 में बेस्ट एक्टर के रूप में अवार्ड मिला तो 1961 कोहिनूर फ़िल्म में बेस्ट एक्टर का अवार्ड उनके हिस्से गया।लीडर,राम और श्याम,शक्ति फिल्मो के लिए दिलीपकुमार को बेस्ट एक्टर घोषित किया गया।दिलीप को 1994 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड तो 1968,1983,1994 और 2005
 में फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया।राज्यसभा के सदस्य रहे दिलीपकुमार को 1998 में उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान ए इम्तियाज प्रदान  किया। बॉलीवुड में सुपरहिट फिल्मों में किरदार निभाने वाले दिलीप साहब को कई बार ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता रहा है।बॉलीवुड की शान दिलीप कुमार ने उनके जमाने के अभीनेता और अभिनेत्रियों के साथ काम किया।उनकी धर्मपत्नी सायरा बानू साये की तरह उनके साथ रही। दिलीप इस फानी दुनिया को छोड़ गए है।हमारे प्रिय अभिनेता दिलीप साब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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