
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने और मितव्ययिता (किफायत) बरतने की अपील के दूसरे ही दिन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने एक प्रशंसनीय और आदर्श निर्णय लिया है। सी.आर. पाटिल ने घोषणा की है कि जब तक युद्ध की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक वे किसी भी सरकारी या निजी कार्यक्रमों में पायलट या एस्कॉर्ट वाहनों का उपयोग नहीं करेंगे।
इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की बचत कर राष्ट्रहित में योगदान देना है। सी.आर. पाटिल ने आज से ही इस नियम को लागू कर दिया है और वे अपने निर्धारित कार्यक्रमों के लिए एस्कॉर्ट या पायलट वाहन के बिना ही रवाना हुए। केंद्रीय मंत्री के इस निर्णय से अन्य मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मंत्रिमंडलों को भी मितव्ययिता की प्रेरणा मिलेगी।
सी.आर. पाटिल ने कहा कि जब देश और दुनिया कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के संकट का सामना कर रही है, तब एक जिम्मेदार प्रतिनिधि के रूप में ईंधन बचाना हमारा कर्तव्य है। प्रधानमंत्री के ‘जल शक्ति’ और ‘कैच द रेन’ जैसे अभियानों को जिस तरह उन्होंने सफल बनाया है, उसी तरह अब ईंधन बचाने के इस संदेश को भी वे जन-जन तक पहुँचाना चाहते हैं।
केंद्रीय मंत्री की इस ‘पहल’ के कारण सामान्य नागरिकों में भी एक सकारात्मक संदेश गया है कि जब नेतृत्व स्वयं पालन करता है, तभी समाज में बड़ा परिवर्तन आता है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया भी शामिल हुए
सी.आर. पाटिल की इस पहल के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने भी प्रधानमंत्री के बयान का सम्मान करते हुए पायलट कार अपने पास न रखने का फैसला किया है। दोनों नेताओं ने साफ कर दिया है कि जनप्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने इंधन बचाकर एक-एक अहम फैसला लिया है।



