युवा उद्योगपति सम्राट पाटिल नवयुवकों के लिए बने प्रेरणा की मिसाल

कौन कहता है कि आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…. जब सम्राट पाटिल जैसे कर्मयोगियों की चर्चा हो तो कवि दुष्यंत कुमार की यह पंक्ïित लाजिमी हो जाती है। आइए आप सबको रूबरू करवाते है सूरत के अरूणा टेक्सटाइल हब फेक्टरी आउटलेट प्रा.लि. के चेयरमेन 37 वर्षीय सम्राट पाटिल से। सम्राट पाटिल का जन्म महाराष्ट्र के जलगांव जिला एरडोल तहसील के आडगांव में 7 जून 1984 को हुआ। पिताश्री अभिमन पाटिल और माताश्री अरुणा पाटिल की आप तीन संतानों में से एक है।

आपने बचपन के दिनों को याद को याद करते हुए सम्राट पाटिल कहते है कि बचपन विपरित परिस्थितियों में गुजरा। बचपन से ही घर की आर्थिक परिस्थिति को संवारने में जुट गया था। हालांकि ज्यादा शिक्षा नहीं ले पाया लेकिन हालात ने बहुत कुछ सीखïा दिया। बहुत कम उम्र में ही कपड़ा मार्केट में नौकरी से शुरूआत की। भले ही उम्र कम थी, लेकिन तर्जुबा ज्यादा था। इसके बाद धीरे-धीरे कपड़ा मार्केट में व्यापार की बारकियां सीखते हुए छोटे पैमाने पर मार्केट में किराये से दुकान लेकर व्यापार की शुरूआत की और मालिक बनने का दिन साकार हो गया।ï पारिवारिक जिम्मेदारियां और व्यापार में कुशलता लाकर सम्राट पाटिल अपने लिए नहींï, लोगों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गए। बिना किसी व्यापारिक पृष्ठभूमि के बावजूद वह महानगर में अपने आपको स्थापित करने में सफल रहे।

सम्राट पाटिल दिन-रात परिश्रम करते रहें। आज उनका पूरे देश में व्यापार फैल गया। हर राज्य के मेट्रो और मिनी मेट्रो शहरों में उनका कपड़ा जाता है। उनके जीवन में कई चढ़-उतार आए लेकिन उन्होंने हौसला बरकरार रखा। व्यापार की रणनीति बदल दी और उसके बलबूते पर आज अपना एम्पायर खड़ा किया है। आज भी लगभग 100 से ज्यादा स्टाफ आपके साथ काम कर रहा है। सम्राट पाटिल के साथ काम करने वाले कर्मचारी कहते हैं कि हम कर्मचारी नहीं बल्कि एक परिवार का हिस्सा बनकर काम करते हैं। यहीं कारण है कि कोरोना काल में किसी स्टाफ को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। इतना ही सम्राट पाटिल ने अपने सामथ्र्य भर अनाज, फल, खाना इत्यादि बांटते रहे।

कोरोना काल को राष्ट्रीय विपदा मानते हुए सम्राट पाटिल कहते है कि हमें विश्वास है कि भारत इस संकट से उबरेगा और विश्व गुरू बनेगा। युवाओं के लिए सम्राट पाटिल हमेशा चिन्तित नजर आते हैं। वह कहते हैं कि सामाजिक एकता और मनोबल से अगर समाज में काम किया जाए तो समाज में काम किया जाए तो समाज तेजी से विकास की धारा पर चल पड़ेगा। लोग अगर अहम त्याग दें तो इमानदार और परिश्रमी यह समाज दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति करेगा ऐसा मेरा विश्वास है। सम्राट पाटिल के इसी जज्बात, हौसले और विश्वास को देखते हुए यह कहना ही पड़ेगा कि आप सही मायने में है समाज के अनमोल रतन। उनकी मेहनत और ईमानदारी समाज के युवाओं के लिए प्रेरणाोत है।

युवा उद्यमी सम्राट पाटिल को जन्मदिन पर भारत मिरर की ओर से ढ़ेर भारी शुभकामनाएं

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