
72 खांपों की गौरवशाली विरासत, सेवा, संस्कार, समृद्धि और राष्ट्र निर्माण का प्रतीक माहेश्वरी समाज
महेश नवमी माहेश्वरी समाज का सबसे महत्वपूर्ण और गौरवशाली पर्व है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि माहेश्वरी समाज के उत्पत्ति दिवस, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण में योगदान का प्रतीक है। इस अवसर पर माहेश्वरी समाज अपने इतिहास, संस्कारों और सामाजिक उत्तरदायित्व को स्मरण करते हुए भगवान महेश (भगवान शिव) के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है।
माहेश्वरी समाज भारत के सबसे प्रतिष्ठित, संगठित और प्रगतिशील वैश्य समाजों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति राजस्थान के खण्डेला (जिला सीकर) से मानी जाती है।
लोकमान्यता के अनुसार खण्डेलसेन के वंश के 72 उमरावों ने भगवान महेश (भगवान शिव) की आराधना की और उनकी कृपा से उन्हें नया जीवन एवं नई दिशा प्राप्त हुई। इसके पश्चात उन्होंने शस्त्र के स्थान पर शास्त्र, व्यापार, सेवा, सदाचार और लोककल्याण का मार्ग अपनाया तथा “माहेश्वरी” कहलाए। भगवान महेश को समाज का आराध्य देव माना जाता है। इसी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को महेश नवमी पूरे देश और विश्वभर में बसे माहेश्वरी समाज द्वारा श्रद्धा, उत्साह और गौरव के साथ मनाई जाती है। यह दिवस समाज का स्थापना दिवस, एकता दिवस और गौरव दिवस माना जाता है।
विश्वभर में फैले माहेश्वरी समाज की अनुमानित जनसंख्या लगभग 9 से 12 लाख मानी जाती है। समाज की पहचान उसकी 72 मूल खांपों से है, जिनमें अजमेरा, बाहेती, बजाज, बिड़ला, चांडक, डागा, गट्टानी, झंवर, काबरा, लाहोटी, मालपानी, मोहता, मूंदड़ा, राठी, सारड़ा, सोमानी, तोषनीवाल सहित अनेक प्रतिष्ठित खांप शामिल हैं।
राजस्थान से निकलकर यह समाज आज गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तेलंगाना सहित भारत के लगभग सभी राज्यों तथा अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, सिंगापुर एवं अन्य देशों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।
माहेश्वरी समाज ने शिक्षा, उद्योग, व्यापार, चिकित्सा, प्रशासन, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। देशभर में समाज द्वारा संचालित विद्यालय, महाविद्यालय, छात्रावास, अस्पताल, धर्मशालाएं, छात्रवृत्ति योजनाएं, रक्तदान शिविर, चिकित्सा शिविर, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत तथा अनेक सेवा परियोजनाएं समाज की सेवा भावना को दर्शाती हैं। समाज का राष्ट्रीय संगठन अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा, जिसकी स्थापना वर्ष 1907 में पुष्कर (राजस्थान) में हुई थी, आज भी समाज को संगठित करने, शिक्षा, सेवा, युवा एवं महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
उद्योग एवं व्यापार जगत में माहेश्वरी समाज ने भारत को अनेक महान विभूतियां दी हैं, जिनमें घनश्यामदास बिड़ला, आदित्य विक्रम बिड़ला, कुमार मंगलम बिड़ला (आदित्य बिड़ला समूह), जमनालाल बजाज एवं राहुल बजाज (बजाज समूह), श्री रामेश्वरलाल काबरा एवं परिवार (RR Kabel) जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इन उद्योग समूहों ने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार, शिक्षा और सामाजिक विकास के अवसर भी प्रदान किए।
राजनीति, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में भी माहेश्वरी समाज का योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्तमान में श्री ओम बिरला देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक लोकसभा अध्यक्ष के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न कालखंडों में माहेश्वरी समाज के अनेक व्यक्तित्व सांसद, विधायक, मंत्री, महापौर, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासकीय अधिकारी एवं ब्यूरोक्रेट्स के रूप में देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
महेश नवमी के अवसर पर देशभर में भगवान महेश एवं माता पार्वती की पूजा-अर्चना, शोभायात्राएं, महाआरती, रक्तदान शिविर, चिकित्सा शिविर, प्रतिभा सम्मान समारोह, वृक्षारोपण, सामाजिक सेवा कार्यक्रम एवं सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। यह पर्व समाज को अपनी गौरवशाली विरासत, संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की प्रेरणा देता है।
आज माहेश्वरी समाज “संगठन, संस्कार, सेवा, शिक्षा और समृद्धि” के मूल मंत्र के साथ देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है तथा आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सामाजिक समर्पण और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ते हुए निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
गोविंद मूंदड़ा
उपाध्यक्ष, वेसू माहेश्वरी सभा, सूरत
संयोजक, सूरत महाराष्ट्र माहेश्वरी परिवार



