
सूरत। जीएसटी के तहत ई-वे बिल की जांच के लिए राज्य में 24 घंटे चलने वाली मोबाइल स्क्वॉड व्यवस्था को बंद कर इंटेलिजेंस आधारित रैंडम चेकिंग लागू करने की मांग उठी है। द सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र भेजकर ई-वे बिल जांच की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।
चैंबर अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने कहा कि कर चोरी और जीएसटी में गड़बड़ी रोकने के सरकारी प्रयास जरूरी हैं, लेकिन हाईवे पर लगातार जांच के कारण ई-वे बिल में छोटी क्लेरिकल या तकनीकी गलती होने पर भी कई बार वाहन और माल रोक लिया जाता है। इससे ईमानदार व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कई दिनों तक अटकता है माल
चैंबर के अनुसार, वाहन रोके जाने से माल की डिलीवरी में देरी होती है और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बाद में न्यायिक मंच से राहत मिलने के बावजूद अपील, वकील की फीस और प्रशासनिक प्रक्रिया में समय व धन खर्च होता है। इसका सीधा असर MSME इकाइयों और निर्यात कारोबार पर पड़ता है।
जीरावाला ने कहा कि लगातार हाईवे चेकिंग से मालवाहक वाहन कई बार दिनों तक अटके रहते हैं। इससे गुजरात की कारोबारी प्रतिस्पर्धा और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की छवि प्रभावित होती है।
डेटा एनालिटिक्स से हो जांच
चैंबर ने सुझाव दिया कि नियमित चेकिंग के बजाय जोखिम और खुफिया जानकारी के आधार पर वाहनों की जांच की जाए। इसके लिए RFID, FASTag, CCTV और GSTN के डेटा एनालिटिक्स का अधिकतम उपयोग किया जाए। मोबाइल स्क्वॉड में तैनात मानवबल को वास्तविक कर चोरी, फर्जी बिलिंग, सर्वे और डेटा आधारित जांच में लगाया जाए।
CBIC सर्कुलर का पालन कराने की मांग
चैंबर ने सामान्य टाइपिंग अथवा तकनीकी गलती के मामलों में कठोर कार्रवाई से बचने की मांग की है। इसके लिए CBIC के सर्कुलर क्रमांक 64/38/2018-GST का पालन सुनिश्चित करने और फील्ड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
चैंबर ने नई व्यवस्था के प्रभाव का आकलन करने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग और व्यापारिक संगठनों के बीच समय-समय पर समीक्षा बैठक आयोजित करने की भी मांग की है।
चैंबर की मांगों की प्रतिलिपि उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, वित्त मंत्री कनुभाई देसाई, वित्त राज्य मंत्री कमलेश पटेल और मुख्य वाणिज्यिक कर आयुक्त को भी भेजी गई है।



