
सूरत। भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित सूरत और आसपास के क्षेत्रों में जनजीवन को जल्द सामान्य करने के लिए राज्य सरकार ने युद्धस्तर पर राहत एवं पुनर्वास कार्य शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने देर रात सूरत कलेक्टर कार्यालय में जिला प्रशासन, नगर निगम और सभी समन्वय अधिकारियों के साथ हाई लेवल समीक्षा बैठक कर राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में उपमुख्यमंत्री ने जल निकासी, व्यापक सफाई अभियान और नागरिकों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अगले 48 से 72 घंटे के भीतर बाजार, दुकानें और सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से सुचारु किया जाए। साथ ही जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए।
हर्ष संघवी ने बताया कि प्रभावित नागरिकों तक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन दिन-रात कार्य कर रहा है। अब तक 9,100 से अधिक परिवारों का डोर-टू-डोर सर्वे पूरा किया जा चुका है। इनमें से 800 से अधिक प्रभावित परिवारों को ₹6,800 प्रति परिवार की दर से घरेलू सामग्री एवं नकद सहायता सीधे उपलब्ध करा दी गई है। शेष पात्र परिवारों तक भी सहायता पहुंचाने के लिए अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं।
उन्होंने बताया कि शहर के 58 छोटे-बड़े मोहल्लों और व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानों एवं कारोबार को हुए नुकसान का सर्वे भी तेजी से किया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सरकारी सहायता को लेकर जल्द निर्णय लिया जाएगा। सरकार प्रभावित व्यापारियों को शीघ्र राहत देने के लिए पहले से आवश्यक आंकड़े भी तैयार कर रही है।
यदि किसी क्षेत्र या सोसायटी का सर्वे तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है, तो उसके लिए कलेक्टर कार्यालय में विशेष प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा हेल्पलाइन भी शुरू की गई है। शिकायत मिलने पर तत्काल सर्वे टीम भेजकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में पूरा सरकारी तंत्र और प्रशासन राहत एवं पुनर्वास कार्यों में पूरी तत्परता से जुटा है तथा सूरत बहुत जल्द सामान्य स्थिति में लौटकर एक बार फिर देश के विकास इंजन के रूप में अपनी गति हासिल करेगा।



