धर्म- समाज

पुरुषोत्तम मास में सैकड़ो महिलाओं ने बाणगंगा को अर्पित की 972 मीटर चुनरी

सिर्फ नदी नहीं ,आस्था का केंद्र है गंगा – डॉ मंजू लोढ़ा

मुंबई । महानगर की आध्यात्मिक धरोहर दक्षिण मुंबई के वालकेश्वर में स्थित प्राचीन तालाब बाणगंगा में पुरूषोत्तम मास के पावन महिने में सैकडों की तादाद में जुटी महिलाओं ने 972 मीटर चुनरी लेकर बाणगंगा की गाजे-बाजे के साथ परिक्रमा की और हर-हर गंगे के जयकारे के साथ गंगा को चुनरी अर्पित की।

इसके वाद विशेष अतिथी समाजसेवी डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढा, महिलाओं के साथ मां गंगा की आरती में शामिल हुई। डॉ लोढा ने महिलाओं को सौभाग्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत में गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है,अपितु गंगा मैया के रूप में पूजी जाती हैं। गंगा नदी जल के रूप में जीवन देती है। उन्होंने कहा कि जब आप इसके पवित्र जल में डुबकी लगाते है, तो आप सकारात्मक ऊर्जा से भर जाते है। यह सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि पूरी संस्कृति है।

समस्त श्रीमाली महिला मंडल द्वारा आयोजित शनिवार को हुए इस भव्य कार्यक्रम में हर जाति व उम्र की महिलाओं ने जोर-शोर से भाग लिया। कार्यक्रम की सूत्रधार माला दवे ने बताया कि समस्त श्रीमाली मुंबई महिला मंडल के सहयोग से चूंदडी मनोरथ उत्सव के लिए सूरत से 108 मीटर के 9 बंडल चुनरी के मंगवाए गए और गंगा मां को अर्पित कर वापस उसे महिलाओं को प्रसादी स्वरूप दे दिया गया।

पुरूषोत्तम मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित दिनेश दवे ने कहा ‘अधिक मास में गंगा स्नान व दान से जितनी भी निगेटीव ऊर्जा व्यक्ति के अंदर है, उसका निस्तारण होता है। सकारात्मक फिजिकल व मेंटल एनर्जी आपको आध्यात्मिक उत्थान की ओर ले जाती है। जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा उस पर होती है, क्योंकि अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णू खुद बने थे।’

यात्रा का स्वागत कर रहीं मोना जाजू ने कहा, ‘महिलाओं द्वारा हर-हर गंगे का उद्घोष आसपास की फिजाओं में फैल पूरे माहौल में सकारात्मक ऊर्जा दे रहा है। वही बोरीवली से अपनी तीन गुजराती सखियों के साथ इस यात्रा रेणु दवे और ठाणे से आई प्रेमलता व्यास ने बताया कि अधिक मास में गंगा स्नान से सभी पाप कर्मों की निवृत्ति और चुनरी महोत्सव में भाग लेकर सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वे आई है। पूजा कार्य पंडित मुकेश दवे के तत्वाधान में हुआ।

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