दक्षिण गुजरात में रोजाना 300-400 मेट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादन के बावजूद किल्लत

सूरत शहर सहित दक्षिण गुजरात में ऑक्सीजन की काफी किल्लत से मरीजों के परिजन चितिंत है। ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों को जान का जोखिम है। भले ही सूरत शहर सहित दक्षिण गुजरात में विभिन्न कंपनियों द्वारा प्रतिदिन 300 से 400 मेट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि सूरत या आसपास के जिलों को ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए भटकना पड़ रहा है।

सूरत शहर सहित दक्षिण गुजरात में कोरोना के मामलों में वृद्धि के साथ गंभीर रूप से बीमार मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। जिससे ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। सूरत शहर और उसके आसपास ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन मरीज इसे पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कांग्रेस द्वारा सूरत जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया था जिसमें कहा गया था कि दक्षिण गुजरात की सभी कंपनियां जिनमें हजीरा की आईनॉक्स, दहेज की लिंडे इंडिया और बिरला कॉपर, भरूच की जीएनएफसी और झगडिय़ा की एक्लिंक, सूरत में पद्मावती प्रोडक्शन और विज्ञोश प्रोडक्शन सहित कंपनियां कुल 300 से 400 मेट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहे है। साथ ही सूरत के अस्पतालों को 210 या 220 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, इसके बाजवूद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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