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 विश्व योग दिवस : योग भारत की अमूल्य निधि है

योग स्वस्थ ,सुखी ,सक्रिय व विश्वसनीय जीवन जीने का मार्ग प्रस्तुत करता है। यह एक कल्पवृक्ष है जो बिना किसी भेदभाव के सबको सुख शांति की छाया देता है। मनुष्य का वर्तमान जीवन समस्याओं से संतप्त है । शायद ही कोई होगा जो समस्याओं से व्यथित न हो। समस्याएं जीवन की पर्याय बन गई है। जिन विषयो के बारे में विज्ञान आज चुप्पी साधे है उन सभी विषयों का संतोषप्रद समाधान योग के पास् है वास्तव में योग हर समस्याओं का समाधान है। यह व्यक्ति के तन और मन को स्वस्थ्य ही नही रखता है,अपितु व्यक्तिव विकास और रूपांतरण दोनों का साधन भी है।

योग अंतरंग को अनंत आनद से अल्पावित करने का एक शशक्त माध्यम है। किंतु योग को समस्याओं का विसर्जक नही कहा जाता है। वह मन का परिमार्जक है। योग में अनेक शक्ति है। इसकी उपयोगिता असीम है। पर मानव की क्षमता सीमित है। मनुष्य ने इस सीमित क्षमता के माध्यम से योग की इस अनंत शक्ति को परखने और पहचानने का प्रयास किया है।

विदेशी धरती पर योग सौंदर्य प्रसाधन का निमित था। लेकिन वर्तमान सरकार ने विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की प्रेरणा से ओतप्रोत पश्चिमी देशो के लोग आज योग दिवस पर सभी योग करेंगे। मानव ने इसको अधिक गहराई से जानने समझने की क्षमता बढ़ी तो यह चिकित्सा के क्षेत्र में स्वास्थ्य का मूलभूत आधार बना।

रोग शारीरिक ही नही मानसिक भी होते है। जिसे मानसिक अस्वास्थ्य प्राण असंतुलन व रहन सहन की आवश्यकता है।जिसे योग के द्वारा ठीक किया जा सकता है। प्राचीनकाल में सब बीमारियां योग से ही ठीक हुआ करती थी। लोग योग क्रियाओं में पारंगत थे। पुरातत्व विभाग इस सत्य को स्वीकारते है कि हमारे पूर्वज योग में निष्णात थे। बीच मे योग विलुप्त हुआ और एक सीमित क्षेत्र अर्थात योग,विधा में प्रशिक्षित वर्ग के लोगो मे कैद होकर रह गया।

आज योग पुनः जन जन का प्रिय विषय बनता जा रहा है।डॉक्टर प्रशासक शिक्षक विद्यार्थी रोगी राजनीतिक तथा सामान्य गृहस्थ भी अर्थात प्रत्येक वर्ग की जुबान पर है।आज सभी योग दिवस पर योग कर अपने स्वस्थ जीवन की और अग्रसर होंगे। गांव से लेकर महानगरों में लोग योग के बारे में अधिक से अधिक जानने समझने की जिज्ञासाए ख रहे है। वर्तमान युग मे आम लोगो की धारणा बनती जा रही है कि तनाव और अशांति को रोकने या समाप्त करने का यदि कोई उत्तम उपाय या साधन है तो वह है योग।

योग मानव जीवन मे आयी विकृतियों को,संस्कारो में बदलने की अभूतपूर्व क्षमता है यह योग अनेक दूषणो प्रदूषणों से व्यक्ति को बचाता है। अमेरिका के डॉक्टर तो यहां तक कहने लग गए है कि रोगोपचार की जितनी भी पद्धतियां है वे सब योग के बिना अपूर्ण है। इसी आधार पर पाश्चात्य देशों में तो कार्यालयों स्कूल आदि सभी क्षेत्रों में योग का प्रशिक्षण दिया जाने लगा है।

विदेशियों के भारत आने का एक ही कारण है कि योग के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारियां चाहते है क्योकि वे इस बात पर भलीभांति परिचित है कि भारत योग का मूल केंद्र रहा है भारत की यह अमूल्य निधि है किंतु विडंबना यह है कि जिस संपदा के विषय मे जानने के लिए विदेशी लोग भारत आकर अपने को धन्य मानते है उसी संपदा के प्रति भारत के लोग जागरूक नही है।ये योग से हटकर भोग की दिशा में भटक रहे है।

विदेशो में योग के बढ़ते हुए रुझान को देखते हुए यहा के अनेक योगी वहा पहुंचे। वहां उन्हें आशातीत सफलता भी मिली। विदेशी मौलिक संसाधनों से सम्पन्न है। उन्हें लालसाएं तृष्णाएं व्यथित किये हुए है। सुख शांति की प्राप्ति के लिए उनमे बैचेनी छटपटाहट उसी प्रकार है जिस प्रकार एक माँ का बेटा खो जाने पर माँ उसे खोजती फिरती है।योग की आज मांग है। जीवन मे इसकी उपयोगिता निश्चित ही असंदिग्ध है किन्तु इन सभी योगों का उधेश्य एवं कार्य तो एक ही है अनंत आनन्द की प्राप्ति। योग साधनाएं किसी को भी बलिष्ठ बना देती है।,योग के द्वारा व्यक्ति अपने अंतरंग में व्याप्त अनंत शक्ति को जगा सकता है।

( कांतिलाल मांडोत )

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